नेपाली पत्रकार लोग से हामार निहोरा !


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नेपाली पत्रकार लोग से हामार निहोरा ! 

हार्दिक अपिल-

eनेपाल में आईल माहाभुकम्प नेपाल देश में केतना बर्बादी कईले बा कोई से छुपल नईखे I नेपाल देश में भूकम्प पीड़ित लोग के उदार करे खतिरा दुनिया के हर देश से उदार कर्मी लोग निस्वार्थी भावना से आईल बा लोग औरी कर भी रहल बा लोग I नेपाल अभी बहुते नाजुक समय से गुजर रहल बा औवुरी एह नाजुक समय में पत्रकार संघतिया लोग के सही औरी सटीक समाचार छाप के नेपाल देश के पत्रकारिता के दुनिया में नाम चिनाहवल बहुत जरुरी बा I आज नेपाल में नेपाल से ज्यादा बिदेशी मिडिया लोग एह देश में मिडियाबाजी कर रहल बा लोग I जेकरा जाथी मन करता कह देहेन्ही औवुरी जाथी मन कर ता देखा देहेनी I

आज नेपाल में आईल बिनाशकारी भूकम्प के बारे में सही जानकारी लेवे खतिरा भूकम्प से क्षति भईल बहुते अईसन जगह बा जहा अभी तक ना त नेपाल के संचार कर्मी लोग पहुचल बा नहीं बिदेशी संचारकर्मी लोग I बस एके गो सामाचार के मसाला लगा लगा औरी भाषा बदल बदल के हर मिडिया से प्रसारण कर रहल बा लोग I काठमांडू राजधानी भईला से ह सायद की सारा मिडियाबाजी काठमांडू में ही हो रहल बा I एकर ईगो वजह ईहो बा की काठमांडू में हर जगह सि सि टीबी क्यामरा में कैद जियते भूकम्प के तस्बीर I कोई पत्रकार संघतिया लोग के भूकम्प से पीड़ित गाव नईखे लउकत I का नेपाल के पत्रकारीता ख़ाली राजधानी औरी सदरमुकाम में ही सिमित बा ? का नेपाल के पत्रकार चाहे संचारकर्मी लोग दुर्गम जगह के पीड़ित लोग के पीड़ा अपना कलम से लिखे में औरी आपना क्यामरा में कैद करे में असमर्थ बा लोग ? का गाव के भूकम्प पीड़ित के जिनगी के कौनो अधिकार नईखे नेपाली चाहे बिदेशी मिडिया में ?

नेपाल में आईल यी माहाप्रलय पुरे नेपाल देश के झकझोर के रख देहेले बा आज हमनी सिन्धुली के माँडी में पहुचल रहनी I पुरे सिन्धुली में ५० गो गाव बा जेमे से ४० गो गाव पूर्ण रूप से ध्वस्त हो गईल बा I एह जगह पर ना कौनो पत्रकार पहुचल बाड़े नाही ज्यादा राहत के सामग्री I सिन्धुली के सहायक जिल्ला प्रशासन अधिकारी जी से पता चलल ह की की ४० गो गाव में कमती में २५००० घर पूर्ण रूप से टूट चुकल बा I रहे के त्रिपाल के खोजी होता पर मिलत नईखे I हमनी कुछ राहत सामग्री ले के गईल रहनी सन I सहायक जिल्ला प्रशासन अधिकारी औरी कंदमूल कह के जगह के संसद जी हमनी के बतावानी की अभी ईहा चाऊर, दाल, नून, तेल, मसाला, तरकारी औरी सब से ज्यादा जरुरी वाला चीज बा त्रिपाल I

का अईसन जगह पर देश के चौथा अंग पत्रकार जी लोग नईखे जा सकत ? का ईहा के जानता के दर्द दर्द ना ह ? का यी २५००० घर के क्षति से नेपाल के न्यूज चैनल के टी. आर. पी. ना बढ़ी ? हामार निहोरा बा सारा पत्रकार संघतिया चाहे संचार जगत में लागल हर उ ब्यक्ति से की ब्याव्शायिक सोच के बदल के यी बिनास्कारी स्थिति में मानवता के सोच बनाई लोगन I अप्रमाणिक, अबैज्ञानिक औरी तथ्य रहित चाहे दोसरा के नक्कल वाला समाचार छापला चाहे प्रसारण कईला के जगह रौउवा लोगन प्रमाणिक, बैज्ञानिक, सत्य औरी खुद पीड़ित के दर्द बुझ के समाचार के छापे के चाहे देखावे के कोशिस करी लोगन I

अभी भी फेसबुक पर देखल जाता बहुत पत्रकार संघतिया लोग आपन वाल पर सामाचार लिखत बानी लोग जेमे भारतीय के बिबाद त पाकिस्तानी बिबाद त कही नेता लोग के खिचाई करत रहता लोग I आज ९ दिन हो गईल नेपाल में भूकम्प के आवत औरी उ भी लगातार अर्थात हर दिन कही ना कही एक बेर जरुर आजाता I रोज आदमी लोग मरता औरी रोज केतना आदमी घायल हो जाता लोग I का भूकम्प के पीड़ा से बड़का बा दोसर देश जे सारा पत्रकार लोग आपन देश के जानता के पीड़ा औरी दर्द के भुला के दोसरा देश के पीछे औरी नेता जी लोग के पीछे आपन समय देता लोग I

कोई पत्रकार संघतिया लोग अपन फोटो अपडेट करे में लागल बा लोग त कोई आपन खुद के प्रचार करे में त कोई नेता औरी बिदेशी के बारे में बहस करे में I का संचारकर्मी औरी पत्रकार संघतिया लोग खातिर यी सब करे के उचित समय ईहे ह I का हमनी कुछ दिन खतिरा आपन ब्यवशायिक सोच नईखी सन बदल सकत ? का पत्रिका सिर्फ पईसा कमाए के जरिया बन गईल बा ? की हमनी के पत्रकार लोग ही सक्षम नईखे एह काम में ? की पत्रकारिता जगत में पत्रकारिता सम्बन्धी ज्ञान के कमी बा ? की देश के पत्रकार लोग दोसरा पर निर्भर बा ?

एडमिन पैनल ,HBAB

नोट – HBAB के एडमिन अशोक कुशवाहा आ उनकर टीम सिन्धुली जिल्ला के भ्रमण के समय सामने आईल कुछ सच पर आधारित अपील लिखल गईल बा I निचे उहाके भेजल कुछ तस्बीर रउवा देख सकत बानी I धन्यबाद !

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कुकुरबाझाव औरी नेतागिरी !


कुकुरबाझाव औरी नेतागिरी !

अशोक कुशवाहा
अशोक कुशवाहा

कुकुरबाझाव मतलब कुकुरहट भोजपुरी भाषा के बाड़ा बढ़िया औरी ठेट शब्द हाउवे I कुकुरहट के मतलब दुगो पार्टी के कुकुर लोग अगर जाहा जे एक दोसरा के सामने अईलख लोग की भोका भोकी शुरू होई ओकरा बाद एके तनी में लड़ाई काटाकुटी सब सुरु हो जाला I नेपाल के राजनीति में औरी हमरा गाव के कुकुरहट में हम कौनो अंतर ना देखिला I जईसे देश में चारू ओरिया कुकुर कुकुरहट करे ला लोग ओइसे ही देश के नेता लोग देश भर कुकुरहट करत फिरे लोग I पुरुखन के कहावत झूठ नाहीए होला I भोजपुरी में बाड़ा बढ़िया एगो कहावत बा “ जात जात के भेदिया जाते के घर जाए, गाधाहा नेता कुकुर जात देख नारियाय” I

नेता के ईगो लड़ाई में देश बाद से बत्तर होत जाता ..
नेता के ईगो लड़ाई में देश बद से बत्तर होत जाता ..

कुकुर के भी हमनी के मानव समाज में अलग ही ईज्जत औरी मान मर्यादा बा I नेपाल में कुकुर तिहार के दिन कुकुर लोग के पूजा कईल जाला त कबो कबो अईसन समय आवेला की एको गो लाठी भुइया ना गिरे I आपन नेपाल देश के नेता लोग के हालत भी कुछ अईसनके बा I कबो बिकास के नाम पर पूजा ला लोग त कबो भ्रस्टाचार के दोषी बनला पर एको लात भुईया ना गिरे I कुकुर लोग जईसे हडी के लोभी होखे ठीक नेता लोग ओइसे ही भोट खतिरा होखे लोग I अगर मिस्टेक से कौनो गलती हो गईल त कुता औरी नेता दुनु कट्बो करे लोग I कुता के काटल के रेबीज के सुई बाजार में मिल जाला पर नेता लोग के काटल के सुई ना मिले I

हमनी के देश में किसिम किसिम के कुकुर मिलेला लोग I घर के रखवारी करे वाला कुता, समाज में रह के सामाज के रखवारी करे वाला औरी गाव के रखवारी करे वाला I बाहरी कुकुर देखते झपट परेला लोग I ओइसे ही देश में बहुते किसिम के नेता लोग भी मिलेला लोग I कोई समाज के सत्यनाश करे ला त कोई गाव शहर के बर्बाद करे लोग त कोई देश के जानता औरी देश दुनु के लुटे लोग I फरक एतने होला की भले ही कुकुर लोग के एक दोसरा से ना पटत होखे पर मालिक औरी मानव जाती प्रति ईमानदार औरी बफादार जरुर होले I पर नेता लोग कुता लोग के ठीक उल्टा करतब करे ले I एक नम्बर के इमानखोर नेता लोग कहियो जानता के बफादार ना रहे लोग ना बा लोग औरी ना कहियो होई लोग I
लोग ठीके कहेले की कुकुर के पोंछ कहियो सीधा ना होखे चाहे रउवा १२ बरिस उ लोग के पोछ में घिव या तेल काहे ना लगाई I अईसनके आपना देश के नेता लोग भी बा जे भी सरकार में आई लूटिये के खाई I सारा देश के राजनीति दल लोग के एक दूसरा से सौतेला भाई बहिन के नाता होखेला I ओइही से ह की एक दूसरा में कहियो ना पटे I एक दुसर के बुराई करेमे कहियो पीछे ना हटेला लोग I नेता के कुता कहे में कौनो फरक ना पड़े बाकिर कुता के नेता कहला से कुता लोग के ख़राब लागेला काहे की कुता संघ के हिसाब से भले उ लोग बेरा कुबेरा कुकुरहट/कुकुरबाझाव करे लोग पर ईमान के पाका होखे ला लोग I

लेखक : अशोक कुशवाहा

भोजपुरी के 100 गो मशहूर कहाऊत अवरू मुहावरा …


कहावत

  1. दू बेकत के झगड़ा, बीच मे बोले से लबरा।

  2. बाप के नाम साग पात, बेटा के नाम परोरा।

  3. चउबे गईलन छब्बे बने दूबे बन के अईलन।

  4. हाथी चले बाजार कूकूर भूंके हजार।

  5. अण्डा सिखावे बच्चा के कि चेंव चेंव जन कर।

  6. चिरई के जान जाए, खवईया के स्वादे ना।

  7. पानी में मछरी, आ नव नव कुटिया ।

  8. ना खेलब ना खेले देब, खेलवे बिगाड़ देब।

  9. आम के आम आ अँठिली के दाम।

  10. आन्हर गुरु बहिर चेला, माँगे गुड़ तऽ देवे ढेला।  

    कहावत२

    1. छूछी हाँड़ी टनटन बाजे।

    2.  मूस मोटइहें, लोढ़ा होइहें, ना हाथी ना घोड़ा होईहें।

    3.  अनकर धन पाईं त नौ मन तौलाईं

    4.  नानी के धन, बेइमानी के धन, आ जजमानी के धन फले ना।

    5.  धोबी के कुकुर, ना घर के ना घाट के।

    6.  मिले मियाँ के माँड़ ना, आ बिरयानी के फरमाइश ।

    7.  बड़ बड़ जाना दहाईल जास, गदहा पूछे कतना पानी।

    8.  सावन में सियार जमलें, भादो में बाढ़ आईल। कहलन कि जिनिगी में अईसनका बाढ़ त देखबे ना कईनीं ।

    9. इतर के पानी भीतर गइल, चुम्मा लेत में जात गइल।

    10.  एक लाख पूत, सवा लाख नाती, ओकरा घरे दिआ ना बाती।

    आगे भी देखत रही आ जाए से पहिले कुछ प्रतिक्रिया दी ..कैईसन लागल अपनेके ….

भोजपुरी साहित्य के दुगो पुस्तक बिमोचित


वीरगंज २१ गते माघ10411277_596125500521916_6634402610687814390_n । नेपाल प्रज्ञा–प्रतिष्ठान के  पुर्व सदस्य, गोरखापत्र राष्ट्रिय दैनिक पत्रिका के भोजपुरी भाषा संयोजक तथा चर्चित भोजपुरी भाषा के  साहित्यकार एवं लेखक दिनेश गुप्ताद्वारा लिखित निबन्ध संग्रह “अन्हार में एक रात” आ  मुक्तक संग्रह “आन्हर के शहर में ” कहेवाला  दुगो पुस्तक के  आज रिपोर्टस क्लब नेपाल मधेश क्षेत्रीय कार्यालय के सभाहल में बिमोचन कार्यक्रम सम्पन्न भइल I

उहे  पुस्तक के  बिमोचन कार्यक्रमके  प्रमुख अतिथी नेपाल भोजपुरी समाज के  अध्यक्ष तथा बरिष्ठ भोजपुरी साहित्यकार आ  भोजपुरी भाषा के  भीष्म पितामह पंडित दीपनारायाण मिश्र से  माता सरस्वतीके  तस्वीर में फूल माला तथा अवीर चढावालाके  साथे पानसमें  दीप प्रज्जवलित करत पुस्तक बिमोचन कार्यक्रम के  समुदघाट्न करते उ  दुनु  पुस्तकके  बिमोचन कइले रनी  । 

सो  कार्यक्रम में  साहित्यकार एवं लेखक दिनेश गुप्ता के  प्रमुख अतीथि मिश्र अबीरके  टिका तथा खादा ओढाकर सम्मान भी  कइले रहनी ।
पुस्तक बिमोचन कार्यक्रमके  प्रमुख अतीथि मिश्र  यी पुस्तकसे  भोजपुरी भाषाके  बिकासमें  देखल गईल बाधा अवरोध सबके चिरेके  साथे भोजपुरी भाषा, कला तथा संस्कृतिके  बिकासमें बड़का  कदम  साबित होखो कहके आशा भी  ब्यक्त कइले रहनी ।
लेखक दिने10978712_596125527188580_4144906620413158891_nश गुप्ताद्वारा लिखित निबन्ध संग्रह “अन्हार में एक रात” र मुक्तक संग्रह “आन्हर के शहर में ” कहेवाला  दुनु  पुस्तक के बारेमे  नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानका प्राज्ञ एवं पुस्तक बिमोचन कार्यक्रम के बिशिष्ठ अतीथि उमाशंकर दुवेद्धी “दधीचि” आ साहित्यकार एवं भोजपुरी भाषाविद्ध डा. विश्वम्भर शर्मा भी  उक्त पुस्तक के बारे में  प्रकाश देले रहनी ।
कार्यक्रममें  लेखक गुप्ता अपन  छोट मन्तब्य ब्यक्त करत  नेपालमें  सबसे जादे बोलेवाला  तीसर भाषा भोजपुरीके  बिकास आ आवश्यकता बारे ब्यापक चर्चा कइले रहनी  वोसेही  फिल्म सरह  ही भोजपुरी साहित्य भी आपन  उत्कृष्टता प्रकट करो  कहके  आशा समेत ब्यक्त कइले रहनी  ।
कार्यक्रमके  अतीथि साहित्यकार एवं प्राध्यापक कुमार सच्चितानन्द, नेपाल भोजपुरी प्रतिष्ठान पर्साके अध्यक्ष मास्टर तारा सिहंप्रभात का, ब्य यात्रा पर्साके  संयोजक अरुणबिक्रम शाह, नेपाल भारत भोजपुरी मित्र मण्डलीके  अध्यक्ष डा. शशी भुषण वर्णवाल, लक्ष्मी साहित्य समाज पर्साके अध्यक्ष महेश चन्द्र गौतम, भोजपुरी भाषाके  बरिष्ठ पत्रकार बिजय प्रकाश “ बिन”, गजल साहित्य मञ्च पर्साके दिलीप राज कार्की, हा“स्य ब्यङ्ग मञ्च पर्साके अध्यक्ष बिनोद तिमिल्सीना, बिन्दास एफ.एम. के निर्देशक आर.सि.यादव, प्रिन्ट मिडियाके  तरफ से  कान्तिपुर दैनिक के प्रतिनिधि शंकर आचार्य नागरिक दैनिक पत्रिकाके  प्रतिनिधि रितेश त्रिपाठी लगायत लोग  आ -आपन शुभकामना मन्तब्य ब्यक्त कइले रहे लोग।
उक्त कार्यक्रमके  स्वागत भाषण युवा कबि रितु राज पटेल कइले रहनी वोइसे ही पुस्तक बिमोचन कार्यक्रमके  सभापति रिपोर्टस क्लब नेपाल मधेश क्षेत्रीय संयोजक  कन्हैया गुप्ता के सभापतित्व में सम्पन्न भइल  ।

छठ के बैज्ञानिक महत्व !!!


छठ के बैज्ञानिक महत्व

आनन्द कुमार गुप्ता
आनन्द कुमार गुप्ता

छठ पवनी के धार्मिक, साँस्कृतिक, समाजिक, ऐतिहासिक, पर्यटकिय लगायत बहुत महत्व होते हुवे भी आज के बैज्ञानिक यूग में जवन पवनी आ सँस्कृति के बैज्ञानिक महत्व होला ओह पवनी आ सँस्कृति के ब्यापता आ प्रचार प्रसार संसार भर भइल बा जेमे से एगो छठ भी ह । बैज्ञानिक नजरिया से देखला पर छठ शब्द दूगो शब्द मिल के अर्थात छह् (छव गो अवस्था) आ हाथ् (हाथ योग ) मिलके बनल शब्द ह, अर्थात शाब्कि रुप से छठ के अर्थ छव गो अवस्था में कइल गइल एक किसिम के हाथ योग (जवन योग के माध्यम से प्रत्यक्ष सौर्य शक्ति प्राप्त कइल जा सकेला) जइसने एगो प्रक्रिया ह । दुसर रुप से देखला पर हिन्दु क्यालेन्डर के अनुसार छठ के मतलब सँख्या छव होला जवन कार्तिक माहना के अँजोरिया के छउवा दिन अर्थात षष्ठी तिथि होला ।
योगी श्री ओमकार के अनुसार छठ पवनी निरन्तर रुप से प्रकाश से शक्ति प्राप्त करे वाला प्रक्रिया ह । छठ कइला पर सूरुज के प्रकाश में के ‘फोटोन’ कहल जाए वाला शक्ति ब्रतालु के आँख आ छाला के माध्यम से दिमाग में जाके जैबिक विधुत (करेन्ट) उत्पन्न करेला जवना के चलते सारा देह सौर्य शक्ति से चार्ज हो जाला ।

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छठ के इतिहास 

छठ पवनी कहिआ से शुरु भइल एकर कवनो ठोस प्रमाण नइखे मिलल, बाकिर विभिन्न यूग आ कालखण्ड में विभिन्न प्रमाणसब उल्लेख बा । सत्यूग में पुलस्त्य मुनी आ सत्यब्रती भीष्म के वार्तालाप में छठ के उल्लेख मिलेला त द्वापर में महाभारत काल खण्ड में पाण्डव लोग के अज्ञातवास के बेरिया पाण्डवलोग के कल्याण होखो आ युद्ध में विजय होखो कहके राजा विराट के घरे द्रौपदी सूरुज भगवान के पूजा अर्थात छठ पूजा कइले रहली । दोसर मान्यता के आधार पर अंग देश के राजा सूरुज पुत्र दानवीर कर्ण सूरुज पूजा (छठ पूजा) कइले रहस कहके कथा बा । स्कन्द पुराण में विस्तृत चर्चा सहित कहल गइल बा कि ई ब्रत नियम, निष्ठा पूर्वक जे भी कर सकेला । जात भा धर्म के कवनो बन्धन नइखे । जनाना–मर्दाना (सब उमेर के) ई ब्रत के अधिकारी ह लोग । एसे का स्पष्ट होता कि ई पवनी पौराणिक काल से भी पहिले से प्रचलन में बा ।
इन्साक्लोपेडिया के अनुसार ई पवनी के उल्लेख हिन्दु धर्म के सबसे पुरान ग्रन्थ ‘ऋगवेद’ में भी बा । ऋगवेद में सूर्य पूजा के महत्व के वर्णन कइल बा कि “ हे जाज्वल्यमान सूर्यदेव, जब रउवा उषा के गोदी में उगेनी, तब भक्तजनलोग गीत गाके राउर स्तुति करेला” । ऋगवेद में सूर्य के सब देवता के स्रोत मानल गइल बा आ ऋगवेद के ही अनुसार उदयकालीन आ मध्यकालीन सूर्य के उपासना कइला से दीर्घकाल तकले जीयल जाला । अर्थवेद में सूर्य के औषधिकार घोषित कइल गइल बा । सूर्य के देवत्व के संसार के लगभग सब संस्कृति स्विकार कइले बा । सूर्योपनिषद में उनका के ब्रह्मा, विष्णु, महेश के शक्ति के रुप में बतावल गइल बा । वेद में उल्लेख भइल अनुसार उषा (पहिल किरण) के ही छठ परमेश्वरी कहल बा ।
साम्वपुराण में अपने पिताजी श्रीकृष्ण आ महर्षि दुर्वासा के श्राप से भयंकर कोढ़ से पिडि़त साम्व सूर्य के आराधना के फलस्वरुप रोगमुक्त भइल रहलन कहके चर्चा कइल बा । सूर्यपुराण अनुसार सबसे पहिले अत्रि मुनि के पत्नी सति अनुसुइया अटल सौभाग्य आ पति के प्रेम पावे खातिर छठ व्रत कइले रहली । कुछ द्विान लोग के कहनाम बा कि भगवान राम आ सिता वनवास से लवटला के बाद छठ व्रत कके सूर्य पुजा कइले रहे लोग आ उहे आज लेक चलत आ रहल बा ।
सातवा सतावदी में उत्तर भारत के राजा सम्राट हर्षवद्र्धन के दरबार के कवि वाण भट्ट के साला आ प्रसिद्ध कवि मयूर भट्ट अपने बेटी के श्राप के कारण कोढ़ से पिडि़त भइला के कारण सूर्य उपासना के बाद फेर से सुन्दर आ स्वस्थ शरिर प्राप्त कइलन इतिहास बा आ ओकरे बाद छठ पर्व के प्रचार प्रसार भइल कहके मान्यता बा । मयुर भट्ट ठीक भइला के बाद ‘सूर्यशतकम्’ कहल किताब के भी रचना कइलन ।
बैज्ञानिक नजरिया से देखला पर वेद के समय से ही ई पवनी के प्रचलन बा । हिमालय में तपस्या करेवाला ऋषि लोग एह छठ प्रक्रिया के माध्यम से सूरुज के किरण में रहेवाला सौर्य शक्ति प्राप्त कके महिनो–सालो खाना खइले बिना रहे लोग ।12239993_789490101178107_5801301914577647353_n

छठ के छवगो अवस्था (प्रकाश शक्ति प्राप्त करे के प्रक्रिया) 

छठ के सब प्रक्रिया के छव गो अवस्था में बाटल गइल बा ।
अवस्था १ ः उपवास, सरसफाई आ विशेष अनुशासन के कारण से देह आ दिमाग के निविर्षीकरण (डिटोक्सिफीकेसन) करे में मद्दत मिलेला । ई अवस्था ब्रतालुलोग के देह आ दिमाग के कौस्मिक सौर्य शक्ति प्राप्त करे खातिर तैयार करेला ।
अवस्था २ ः आधा देह पानी में डुबा के खडिअइला के कारण से प्राप्त शक्ति देह से बाहर निकले में कमी आवेला आ शक्ति दिमाग के ओर जाए लागेला ।
अवस्था ३ ः कौस्मिक सौर्य शक्ति ब्रतालु लोग के आँख के रेटिना आ छाला के माध्यम से पिट्युटरी, हाइपोथालामस आ पिनियल ग्रन्थी में प्रवेश करेला ।
अवस्था ४ ः पिट्युटरी, हाइपोथालामस आ पिनियल ग्रन्थी सक्रिय हो जाला ।
अवस्था ५ ः कौस्मिक सौर्य शक्ति विभिन्न स्पाइन आ न्युरोन के माध्यम से शरिर के विभिन्न भाग में जाला आ ब्रतालु के देह कौस्मिक पावर हाउस में परिवर्तित हो जाला । ओकरा चलते शरिर के सब निस्क्रिय तन्तु फेर से सक्रिय हो जाला । एकरा के योग के भाषा में कुन्दालिनी शक्ति कहल जाला ।
अवस्था ६ ः ब्रतालु के देह एगो चैनल (रास्ता) बन जाला जेसे शक्ति उत्पादन होके विभिन्न माध्यम आ रुप में फेरु ब्रहमाण्ड में सञ्चार होला आ ई क्रम जारी रहेला ।birganj-03

छठ के बिज्ञान 

– आदमी के देह एगो शक्ति सञ्चार के रास्ता ह ।
– सौर्य जैविक विधुत आदमी के शरिर में चले लागेला जब देह कुछ खास समय के आ खास वेभलेन्थ के सौर्य किरण पर पडेला ।
– कुछ खास शारिरीक आ मानसिक अवस्था में शरिर के सौर्य जैविक विधुत के लेवे के आ शरिर में प्रवाह होखे के क्षमता बढ जाला ।
– छठ प्रक्रिया आ मान्यता के प्रमुख उदेश्य दिमाग आ देश के विभिन्न भाग में कौस्मिक सौर्य शक्ति प्रवाह करे के ह ।
– रेटिना एगो प्रकाश प्राप्त करेवाला आँख के भाग ह जवन अँजोर पडला पर शक्ति प्राप्त करेला । अर्थात जब आँख अँजोर में पडेला तब विधुत शक्ति रेटिना आ पिनियल ग्रन्थी के जोडेवाला नश होके रेटिना के माध्यम से पिनियल ग्रन्थी में जाला जवना के कारण से ग्रन्थी सक्रिय होजाला । पिनियल ग्रन्थी, पिट्युटरी आ हाइपोथालामस ग्रन्थी के बहुत नजदिक रहेला (ई तिनु के त्रिवेणी भी कहल जाला) जवना के कारण से उत्पादित शक्ति के प्रभाव ई तिनु ग्रन्थी पर पडेला । ई तिनु ग्रन्थी के सक्रिय भइला के कारण से निमन स्वास्थ्य आ शान्त दिमाग प्राप्त होला ।12208345_171200529895405_5695702035007587275_n

छठ कइला से होखेवाला फायदा 

छठ प्रक्रिया में दिमागी अनुशासन पर बहुते दबाव पडेला । विभिन्न मान्यता के पुरा करते ब्रतालुलोग अपनेआप के आ वातावरण के सरसफाई में ब्यस्त रहेला लोग । सरसफाई छठ के एगो बहुत बलवान पक्ष ह जवन छठ के समय में ब्रतालुलोग के दिमाग में रहेला । एकरा चलते एगो बडका निर्विष प्रभाव शरिर आ दिमाग पर पडेला काहेकि शरिर में बहुत किसिम के जैविक रसायनिक परिवर्तन होला । उपवास शरिर के निविर्षिकरण करे में बहुत मद्दत करेला । शरिर में उतपन्न होखेवाला विष से छुटकारा मिलल बहुत अच्छा बात ह काहे कि ई हमनी के शरिर के विभिन्न रुप से नोक्सान करेला ।
निविर्ष अवस्था में शक्ति सञ्चार होखे में सहज हो जाला आ आदमी के फुर्तिला भी बनावेला । कारण सधारण बा । हमनी के शरिर में प्राकृतिक रुप से रहेवाला रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता हमनी के शरिर में उतपन्न होखेवाला विष से लडे में बहुत खर्च हो जाला, बाकिर जइसे प्रणयाम, मेडिटेसन, योग इतयादि आ छठ प्रक्रिया अपनइला पर हमनी के शरिर में उत्पन्न होखेवाला विष के मात्रा बहुत हद तकले कइल जा सकल जाला । विष कम उत्पन्न भइला पर शक्ति के बचत होला आ आदमी फूर्तिला महशुस करेला । जेकरा चलते हमनी के छाला नया आ स्वस्थ लउकेला, आँख से ज्यादा लउकेला आ बुढापा धिरे धिरे आवेला ।

शारिरीक फायदा 

– छठ कइला पर रोग से लडेवाला क्षमता बढेला ।
– छठ के विभिन्न मान्यता आ प्रक्रिया पुरा कइला के बाद सूरुज के सुरक्षित किरिण विभिन्न चरम रोग जइसे घाव, दिनाँय, हगुहट आ कोढ जइसन रोग के ओरवावे में मद्दत करेला ।
– छठ प्रक्रिया से जवन शक्ति शरिर में प्रवाह होला ओकरा चलते खुन में रहेवाला ह्वाइट ब्लड सेल के शक्ति बढ जाला ।
– सौर्य शक्ति के प्रभाव ग्रन्थी सब पर पडेला जेकरा कारण से सन्तुलित हरमोन के उत्पादन होला ।
– हमनी खातिर आवश्यक शक्ति सौर्य शक्ति के प्रत्यक्ष प्राप्त कर सकतानीसँ जेकरा चलते औरी अगाडी शरिर के निविर्ष होखे में मद्दत मिलेला ।

मानशिक फायदा 

– ब्रतालु के दिमाग में एगो रचनात्मक शान्ति के सञ्चार होला ।
– छठ कइला से दिमाग में उत्पन्न होखेवाला नाकारात्मक विचार, क्रोध, खिस, द्वेश, इश्र्या आदी धिरे–धिरे कम होते दिमागी रुप से मुक्ति मिलेला ।
– पूर्ण निष्ठा आ ध्यान पूर्वक छठ कइला से आदमी के अवस्था आ भावना जल्दिए बुझे के, कौनो ज्ञानेन्द्रिय के प्रयोग कइले बिना आदमी के बिचार आ भावना बुझे के झमता के विकास होत जाला ।

छठ में डुबत आ उगत सूरुज के ही काहे पूजा कइल जाला ?

बहुत प्रचलित कहावत बा कि लोग उगत सूरुज के ही प्रणाम करेला, बाकिर छठ के एगो बहुत बडका पक्ष ई बा कि ई पवनी में लोग डुबत सूरुज के भी प्रणाम करेला । बैज्ञानिक रुप से सूर्योदय (उगला के एक घण्टा बाद तकले) आ सूर्यास्त (डुबे से एक घण्टा पहिले से ) के समय में ही आदमी सुरक्षित रुप से सौर्य शक्ति प्राप्त कर सकता । सूर्योदय आ सूर्यास्त के समय में अल्ट्राभ्वाइलेट रेडिएसन के लेभल सुरक्षित अवस्था में रहेला आ सुरक्षित, कवनो हानी बिना आदमी सौर्य शक्ति पूर्ण रुप से प्राप्त कर सकेला ।

मधेश माईके पुकार !


डा.अमरेश कुमार यादव
डा.अमरेश कुमार यादव

मधेश माईके पुकार हो !

मधेशी भाई सबन काहे सहतबानी एतेका अन्याय-अत्याचार । 
जागि - जागि अबिल्मब सुनि मधेश माईके पुकार।। 
कहे खतिरा करत बानी धारणा जुलुस केकरासे मागत बानी अधिकार । 
हमनी सबके अपने मुलुकमे घुमे खातिरा भिसा देवेवाला ह इ सरकार।। 
कवन कहता कि हमनी बिदेशी भगौड़ा हई नहवे हमनीके प्रमाण । 
मधेशके राज्य हवे कपिलवस्तु,सिमरौनगढ़,बिराटनगर औरो जनकपुर जइसन महान।। 
जवन पहाडीया शासक सवन नइखे जान्त करेके मधेशीके समान । 
देखलासे होइ एतिहासमे मधेशपुत्र शासक गोपालवंशीके प्रमाण ।। 
हमनी मधेशीयनके धोती,कुर्ता औरो गमछा बा पहिचान । 
मगर लाद दिहलक उपरसे दोरा, सुरुवाल, टोपी जइसन पहाडीया समान ।। 
बोलेला, लिखेला हमनिएके भासा बा दोसर से बलवान । 
तपर भि शासक सब नेपाली भासाके कहदिहले अगुवान ।। 
हमनिएके पुरवजके खुन,पसिना,बलिदान कइल जग्गा,जमिन । 
शाही भाइ-भारदार सब जिरहल बा जीवन रंगीन ।। 
मगर हमनियके कतेक मधेशी बान्धवके नइखे रोटी,कपडा औरो जमिन ।
तइयो कतेक मधेशी सबन देखइतारन शुभ क्रान्तिके लगन दिन ।। 
सुन लिहनि,हमनि मधेशी बान्धव माई रउअर पुकार । 
गुन्जयमान बा हमनिके कानमे मधेश प्रदेशके चित्कार ।। 
करेके तयार बानी हमनि सबन अब लक्ष्य बाधकके संघार । 
मिटाके छोड़म हमनिसवन मधेशी उपरके अन्याय - अत्याचार ।। 

डा.अमरेश कुमार यादव

नयाँ सरकार कि हाम्रो संविधान ?


नयाँ सरकार कि हाम्रो संविधान ?

गोपाल ठाकुर
गोपाल ठाकुर

काङ्ग्रेस-एमाले-एमाओवादी नेतृत्व मण्डलीको नयाँ संविधान घोषणा अघिदेखि अहिलेसम्म थरूहट-मधेस आन्दोलन जारी छ । आन्दोलनकारीहरूले भारतीय सीमानाकाहरूमा शुरु गरेको नाकाबन्दी अद्यापि जारी छ । यो नाकाबन्दी अघोषितरूपमा भारतले नै लगाएको भन्ने बुझाइ पनि राज्यको आधिकारिक बुझाइको रूपमा प्रस्तुत हुनु पनि आश्चर्यको विषय रहेन । यता नयाँ संविधान घोषणासँगै नयाँ सरकार बन्ने तीन दलीय भद्र सहमति पनि भएको हो-होइन भन्ने विवाद पनि प्रधानमन्त्री सुशील कोइरालाको अनौपचारिक स्वीकारोक्ति पछि लगभग टुङ्गिएको छ । तर नयाँ सरकारको नेतृत्वबारे अझै नेकपा (एमाले) माथि मडारिएको कालो बादल हटेको देखिंदैन । यस्ता बादल छाँट्न अध्यक्ष केपी ओलीकै नेतृत्वमा बहस-पैरवी कार्यदल पनि बनेको छ । तर शीर्षस्थ काङ्ग्रेसीको तर्फबाट एउटा आशङका प्रबलरूपमा सतहमा आएको छ, केपी ओलीको नेतृत्वमा बन्ने सरकारले थरूहट-मधेसमा देखिएको अशान्ति सम्बोधन गर्न सक्तैन । एमाओवादीले यस अघि नै भावी सरकारमा आफ्नो दाबी फिर्ता लिइसकेको छ । त्यसैले घुमाइफिराई भावी सरकार कोइरालाकै नेतृत्वको निरन्तरतामा बनाउने परिकल्पनालाई साकार पार्ने कसरत जबर्जस्त ढङ्गले अघि बढेको देखिन्छ ।
सरकार परिवर्तनको पृष्ठभूमि एकातिर यस्तो छ भने अर्कातिर यसपालिको दशैं, तिहार, छठजस्ता पर्वहरू अब मुखैमा आइसकेको छ । नाकाबन्दीको कारणले इन्धन प्राप्तिको नागरिक अधिकार कुण्ठित भएको महिनौं बितिसक्यो । दशैंको कम्तीमा एक महिना अघिदेखि विगतमा अग्रिम टिकट बुकिङ खोल्ने बस व्यवसायीहरूले यसपटक आजसम्म पनि त्यसो गर्न नसकेको अवस्था छ । अब त सम्बन्धित निकायबाट पनि दशैंको लागि राजधानी छोड्न दशैं नै नपर्खन अनौपचारिक रूपमा आह्वानसमेत भइसकेको छ । तसर्थ रोम जलिरहँदा निरोले बजाएको बाँसुरीभन्दा अबको सरकार परिवर्तनको रस्साकस्सी कुनै पनि अर्थमा फरक देखिन्न । किनभने सरकार परिवर्तनले यी सबै समस्याबाट देशलाई कुनै निकास दिने सम्भावना टाढा-टाढासम्म दृष्टिगोचर भएको छैन । यो परिदृश्यलाई मुसो मार्ने वा नमार्ने विषयमा विचारै नगरिकन बिरालो कुन रङ्गको सुहाउने भन्ने द्वन्द्वसँग सजिलै दाँज्न सकिन्छ ।

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आखिर यस्तो दुरुह परिस्थितिको जिम्मेवारी कसैले लिने कि नलिने ? प्रश्न गम्भीर छ तर सही उत्तर आउने आशा गर्ने ठाउँ पनि छैन । निश्चितरूपमा यस्तो दुरुह परिस्थितिको निर्माण शासक फेर्ने तर सत्ता नफेर्ने नवसामन्ती यथास्थितिवादी चिन्तनले गरेको हो । देशको बहुराष्ट्रियतालाई सहभागितामूलक ढङ्गले सार्वभौम राष्ट्रियता निर्माणको साटो विलयकारी ढङ्गले खस-गोर्खाली अन्धराष्ट्रवादको सुदृढीकरणको सोच नै अहिलेको असहज परिस्थिति निर्माणको कारक हो । तर दुष्कर्मीहरूले दण्ड नपाएसम्म आफ्नो कुकर्म स्विकारेको इतिहास छैन । वीणाको तारलाई सुर-तालका लागि उपयोग गर्न कस्नुपर्छ । तर त्यसको पनि एउटा हद हुन्छ । तन्किएन भने बज्दैन, अत्यधिक तन्काइयो भने चुँडिन्छ । नयाँ संविधान निर्माण पनि त्यस्तै रहयो । उत्पीडित राष्ट्रियताको कोणबाट हेर्ने हो भने राजशाहीले उनीहरूको तारलाई जुन तन्काइमा कसेर औपनिवेशीकरणको वीणा घन्काएका थिए, वास्तवमा बेसुरा भइसकेको थियो । त्यसलाई गणतन्त्रको आलोकमा सुरमा ल्याउनु थियो । तर वर्तमान सत्ताले त्यसलाई झन् कसिदियो । पहाडका आदिवासी जनजातिहरूले एकल राष्ट्रियतामा प्रदेश बनाउन चाहन्थे, उनीहरूलाई एक-अर्कासँग भिडाउने र त्यस्तै झिल्कामा रोटीसेक्ने हिसाबले बहुपहिचानको नाममा जोडियो । ठीक विपरीत मधेसी राष्ट्रियताले समग्रतामा आफूलाई व्यवस्थित गर्न खोजेको थियो, त्यसलाई छ टुक्रामा क्षतविक्षत पारियो । थारू र राजवंशीहरूलाई केही दिनमा नेपालबाटै लखेट्ने गरी सुदूर पश्चिम र सुदूर पूर्वको अखण्डतामा कोचियो । वास्तवमा यही कारण हो जसले गर्दा मधेश त अशान्त छँदै छ, पहाड पनि अशान्त हुन धेरै पर्खनु नपर्ला ।
यस्तो परिस्थितिमा सरकार परिवर्तनको नाटक मञ्चनसँग थरूहट-मधेसको कुनै सरोकार छैन । बरु अत्यधिक कसिएको वीणाको तारजस्तै उनीहरूको पीडाले काठमाडौंसँगको सम्बन्ध दिन प्रतिदिन धरापमा पर्दै गएको छ । यो परिस्थिति कसैको हितमा छैन । त्यसैले यो परिस्थितिको लागि कुनै मित्रराष्ट्रलाई धारे हातले सराप्ने र कसैको मुक्तकण्ठले गुणगान गाउने समय छैन । म्यादी ज्वरो त बाहिर देखिने असहजता मात्रै हो भित्री रूपमा त आन्द्रामा हुने जीवाणु सङ्क्रमण त्यसको कारक हो । त्यसैले अहिलेको परिस्थिति फेर्नका लागि मानसिकतामा परिवर्तन आवश्यक छ, कार्यान्वयनमा परिवर्तन आवश्यक छ, व्यवहारमा परिवर्तन आवश्यक छ, तीतो-मीठो प्रवचन आवश्यक छैन । किनभने गुलियो त पहिले जिब्रोले स्पर्श गरेर थाहा पाउँछ, नाम त भाषा अनुसार फरक पनि पर्न सक्छ । त्यसैले कुनै वस्तु गुलियो छ कि छैन, जिब्रोमा राखेर थाहा पाउनुपर्छ । मुखले भन्दैमा कुनै वस्तु गुलियो हुन सक्तैन ।
जहाँसम्म यो नयाँ संविधानको कुरो छ राम्रो छ, अवश्य पनि राम्रो छ । पहिलोपटक यो सातौं संविधान संविधानसभाबाट आएको छ । गणतन्त्रात्मक छ, लोकतान्त्रिक छ, सङघात्मक छ । तर मुख्यरूपमा यो हाम्रो हुन सकेको छैन । सभासद्हरूको विवेक प्रयोगबाट ६०१ को भौतिक सहभागिताबाट संविधान बन्नुपर्थ्यो, पार्टी ह्वीपमा उनीहरूको प्राविधिक सहभागितामा बनेको छ । सङ्ख्यात्मक रूपमा दुईतिहाईभन्दा बढी बहुमतले बनेको छ र उत्पीडित राष्ट्रियताहरूको तहबाट हेर्दा दुई-तिहाई जनतालाई बाहिर राखेर बनेको छ । यो नै त्यस्तो संविधान हो जुन सार्वजनिक हुनु अगावै निर्माणकर्ताहरूले संशोधनको आवश्यकता महसुस भएको सार्वजनिक अभिव्यक्ति दिएका थिए । यो नै त्यस्तो संविधान हो जसको सार्वजनिकीकरणको दिनलाई एकथरी जनताले कालो दिनको रूपमा तिरस्कार गर्योय । यो नै त्यस्तो संविधान हो जसका निर्माताहरूको देशैभरि पुतला दहन भएको छ ।
सारमा भन्दा यो संविधान जन्मँदै पाण्डुरोगले ग्रसित छ, त्यसैले यसको जीवन जीर्ण रोगीको रूपमा अल्पायुमै समाप्त हुने धेरै आधारहरू प्रदर्शित भइसकेका छन् । तर द्वापरमा पाण्डुको रोगको निदान असम्भव थियो होला, अहिले त्यस्तो छैन । अहिले त त्यस्तो रोगलाई निर्मूल पनि पार्न सकिन्छ तर कथित आधुनिक चिकित्साको एन्टीबायटिक प्रयोगजस्तो टालटुले संशोधनबाट होइन । त्यसको लागि यसको पुनर्लेखन गर्नुपर्दछ । पुनर्लेखनमा समानुपातिक प्रतिनिधित्वको कुनै कार्यदल बन्नुपर्दछ जसमा नेपालका तीनै समुदाय मधेसी, आदिवासी जनजाति र खस-आर्य र तिनकाबीचको विविधतासहितको समानुपातिक प्रतिनिधित्व हुनुपर्दछ । त्यस कार्यदलले यसको पुनर्लेखन गरोस् र पुनर्लिखित संविधानलाई कुनै पनि नाइँनास्तिबिना व्यवस्थापिका-संसद्ले पारित गरोस् । निश्चितरूपमा नेपाली काङ्ग्रेसलाई केपी ओलीको नेतृत्वमा सरकार बन्दा जारी अशान्ति अझै गहिरिने आशङ्का छ भने यसको लागि पहल गरोस् । यो पुनीत कामको जस उसैले पाउने छ । तर जसरी पनि सत्ता हत्याइरख्ने राजशाहीको सोचजस्तै काङग्रेस वा एमाले वा एमाओवादी मण्डली पीडित छ भने विगतका संविधानहरूले जस्तै संशोधन भएर पनि यो नयाँ संविधान पनि जनताको तहबाट परित्यज्य हुने अवश्यम्भावी छ ।
रानीघान, वीरगंज–१२, पर्सा
प्रतीक दैनिक, असोज २०, २०७२

नेपालको संविधान २०७२ मा सम्बोधन भएका र गर्नु पर्ने संशोधनहरु…


नेपालको संविधान २०७२ मा सम्बोधन भएका र गर्नु पर्ने संशोधनहरु

10922531_10155151206265385_257591261808540934_nप्रस्तावना, परिभाषा, नागरिकता र मौलिक हक

१. प्रस्तावनामा मधेश आन्दोलन वा मधेश विद्रोह शब्दावली नपरेको ।
२. धारा ४ः नेपाल राज्यको परिभाषामा धर्मनिरपेक्ष शब्द समावेश भएको, तर स्पष्टीकरणमा “धर्मनिरपेक्ष” भन्नाले सनातनदेखि चलिआएको धर्म संस्कृतिको संरक्षण लगायत धार्मिक, सांस्कृतिक स्वतन्त्रता सम्झनु पर्ने भनेको छ ।
३. धारा ११ः नागरिकताको प्रावधानमा आमा वा बुवा राखिएको छ । तर धारा ११(६) र (७) मा महिलाको स्वतन्त्र अस्तित्व स्वीकार गर्न सकेको छैन । अतः उनीहरु दोश्रो दर्जाको नागरिकको हैसियत दिएको छ । नेपाली महिलाले विदेशी नागरिकसँग विवाह गरेमा निजको सन्तान अंगिकृत नागरिकता पाउनेछन् । वंशजको नागरिकता पाउन बुवाको नागरिकता अनिवार्य गरिएको छ ।
४. धारा २८९(१)ः अंगीकृत नागरिकलाई राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री, प्रधानन्यायाधीश, प्रतिनिधि सभाका सभाभुख, राष्ट्रिय सभाका अध्यक्ष, प्रदेश प्रमुख, मुख्यमन्त्री, प्रदेश सभाको सभामुख र सुरक्षा निकायका प्रमुखको पदमा नियुक्त हुन नदिने व्यवस्था गरेको छ । यो भनेको विदेशी महिला नेपाली पुरुष विवाह गरेमा तिनि यी पदहरुका लागि योग्य हुने छैन ।
५. धारा २८९(२)ः माथिको बुँदा नं. ४ मा उल्लेखित प्रमुख पद बाहेक संवैधानिक पदमा नियुक्त हुन अंगीकृत नागरिकता प्राप्त गरेको व्यक्तिको हकमा कम्तीमा पाँच बर्ष कुर्नु पर्ने हुन्छ ।
६. धारा ३८ः महिलाको समानुपातिक समावेशीको सुनिश्चितता गरेको छ । त्यही अनुरुप मधेशी, दलित, आदिवासी जनजाति, मुस्लिम, थारुको समेत समानुपातिक समावेशी सुनिश्चितता गर्नु पर्ने ।
७. धारा ४०ः दलितको समानुपातिक समावेशी समावेश गरेको छ । तर दलितको हकको धारामा प्रयोग भएका कानुन बमोजिम राखिएको छ । कानुन बमोजिम भन्ने शब्दावली हटाउनुपर्दछ ।
८. धारा ४२ः सामाजिक न्यायको हकमा समावेशी सिद्धान्तका आधारमा राज्यमा सहभागिताको भनेको छ । यसमा अन्तरिम संविधानको धारा २१ बमोजिम समानुपातिक यथावत राख्नुपर्दछ ।

राज्यको संरचना र राज्यशक्तिको बाँडफाँड

९. धारा ५६ को उपधारा (३) सँग सम्बन्धित अनुसुचि ४ मा सात प्रदेशको खाका राखिएको छ । जसमा मधेशलाई ६ टुक्रामा बाँडिएका छ । तसर्थ झापा, मोरंग, सुनसरीलाई प्रदेश नं. २ मा राख्नु पर्छ । नवलपरासी देखि कैलालीसम्मका तराईका ७ जिल्ला समेट्ने गरी थरुहट÷अवध प्रदेश बनाउँदा उपयुक्त हुने ।
१०. धारा ५६(२) ले राज्यको संरचनामा संघ, प्रदेश र स्थानीय तहको सुनिश्चित गरेकोले धारा ५६(४) मा रहेको जिल्ला सभा सम्बन्धी प्रावधान हटाउनु पर्ने हुन्छ ।

संसद, निर्वाचन प्रणाली र शासकिय स्वरुप

११. राष्ट्रपति र उपराष्ट्रपति (धारा ७०), प्रतिनिधिसभाको सभामुख र उपसभामुख (धारा ९१(२)), राष्ट्रिय सभाको अध्यक्ष र उपाध्यक्ष (धारा ९२(२)) तथा प्रदेश सभाको सभामुख र उपसभामुख (धारा १८२ (२) मा एक जना हुनु पर्ने प्रावधान समावेश भएको छ ।
१२. धारा ८४(१)(क) प्रतिनिधिसभाको प्रत्यक्ष तर्फ रहेका १६५ सिटको लागि जनसंख्याको आधारमा निर्वाचन क्षेत्र कायम गर्ने प्रावधान राख्नु पर्छ । हाल भूगोल र जनसंख्याको आधारमा राखिएको छ । बरु कर्णाली, मनाङ जस्ता भौगोलिक विकटता भएको क्षेत्रको लागि विशेष प्रावधान राख्न सकिन्छ ।
१३. धारा ८४(१)(ख)मा प्रतिनिधिसभाको समानुपातिक निर्वाचन तर्फको प्रतिशत अन्तरिम संविधान २०६३ को धारा ६३(३)(ख) मा उल्लेख भए बमोजिम कै हुनुपर्छ ।
१४. धारा ८४(१)(ख) प्रतिनिधिसभाको समानुपातिक तर्फ महिला, दलित, आदिवासी जनजाति, खस आर्य, मधेसी, थारू, मुस्लिम, पिछडिएको क्षेत्र गरी आठ समुह राखेको छ । यस खण्डबाट खस आर्य र सोसँग सम्बन्धित स्पष्टीकरण हटाउनु पर्छ ।
१५. धारा ८६(२) राष्ट्रिय सभाको ५९ जना सदस्य मध्ये ५६ सदस्य प्रत्येक प्रदेशबाट आठ जनाका दरले निर्वाचित हुने प्रावधान राखिएको छ । जसमा ३ महिला, १ अपांग, १ दलित अनिवार्य गरेको राम्रो पक्ष हो । यसमा प्रत्येक प्रदेशबाट एक जना अनिवार्य हुने गरी बाँकी जनसंख्याको आधारमा हुने गरी प्रावधान संशोधन मार्फत राख्नु पर्छ ।
१६. संघ र प्रदेशमा मिश्रित निर्वाचन प्रणाली राखिएको छ । तर स्थानीय निकायको निर्वाचनमा समानुपातिक राखिएको छैन ।
१७. निर्वाचन क्षेत्र निर्धारण आयोगले निर्वाचन क्षेत्रको हरेक २० बर्षमा पुनरावलोकन गर्ने प्रावधान राखेको छ । यसको पुनरावलोकन १० बर्ष गर्नु पर्छ । (धारा २८६(१२))
१८. संघीय मन्त्रिपरिषद धारा ७६(९) र प्रदेश मन्त्रिपरिषद (धारा १६८(९)) समावेशी सिद्धान्त अनुसार गठन गर्ने प्रावधान समावेश भएको सकारात्मक उपलब्धी हो ।
१९. संघीय सरकार (धारा ८२(२)) र प्रदेश सरकार (धारा १७४(२)) ले आफ्नो नियमावलीको पालन भयो वा भएन भन्ने प्रश्न कुनै अदालतमा उठाउन नसकिने व्यवस्था गरेको छ । नियमावलीको कार्यन्वयन सम्बन्धमा अदालतमा प्रश्न उठाउन पाउने प्रावधान संशोधन मार्फत राख्नु पर्छ ।

न्यायपालिका, संवैधानिक आयोग

२०. भाग ११ न्यायपालिकाः यस संविधानले संघ, प्रदेश र स्थानीय गरी तीन तहको संरचना भनिए तापनि जिल्ला अदालत भनि नामाकरण गरिएको छ । यसकारण जिल्ला अदालतलाई स्थानीय अदालत भनि नामाकरण गर्नुपर्छ ।
२१. न्यायाधीशमा समावेशी गरिएको छैन । यसकारण सबै तहको न्यायाधीशको नियुक्ति समावेशी हुने प्रावधान संशोधन मार्फत राख्नु पर्छ । (धारा १२९(१), १३९(३),
२२. सबै तहको न्यायाधीशको संख्या निर्धारण, नियुक्ति बढुवा, सरुवा सम्बन्धी व्यवस्था संघीय कानुन बमोजिम रहने प्रावधान रहेको छ । उच्च अदालत र जिल्ला न्यायाधीशको न्यायाधीशको संख्या निर्धारण, नियुक्ति सम्बन्धी व्यवस्था प्रदेशको कानुन बमोजिम हुनु पर्ने प्रावधान राख्नु पर्छ ।
२३. प्रादेशिक अदालतलाई प्रदेशको अभिलेख अदालतको रुपमा राख्नुपर्ने (धारा १३९) र यसको क्षेत्रअधिकारमा जन्मकैद बाहेको मुद्दाहरुमा पुनरावलोकन सुन्ने र मुद्दाको अन्तिम सुनुवाईको अधिकार समेत राख्नु पर्छ । (धारा १४४(३))
२४. महिला (धारा २५२), दलित (धारा २५५), समावेशी (धारा २५८), आदिवासी जनजाति (धारा २६१), मधेशी (धारा २६२), थारु (धारा २६३), मुस्लिम (धारा २६४) आयोगको संवैधानिक व्यवस्था गरेको छ । साथै ती आयोगको दश बर्षमा पुनरावलोकन समेत गर्न सक्ने प्रावधान राखेको छ । (धारा २६५) पुनरावलोकनको प्रावधान हटाइ स्थायी आयोग नै बनाउनु पर्छ ।
२५. राष्ट्रिय सुरक्षा परिषदमा प्रत्येक प्रदेशको मुख्यमन्त्रीहरु पनि सदस्य रहने व्यवस्था संशोधन मार्फत ल्याउनु पर्ने । (धारा २६६)
२६. नेपाली सेनामा महिला, दलित, आदिवासी, जनजाति, खस आर्य, मधेशी, थारू, मुस्लिम, पिछडा वर्ग तथा पिछडिएको क्षेत्रका नागरिकलाई समानता र समावेशी सिद्धान्तको आधारमा प्रवेशको व्यवस्था गरेको छ (धारा २६७) तर मधेशहरुको समानुपातिक र मधेशी मोर्चासँग भएको ८ बुँदे सम्झौता अनुरुप सामुहिक प्रवेशको व्यवस्था गरेको छैन ।
२७. सरकारी सेवामा सबै समुदायको जनसख्ंयाको आधारमा समानुपातिक समावेशीको आधारमा पद पुर्ति गर्ने प्रावधान सकारात्मक रहेको छ । (धारा २८५) ।
२८. संवैधानिक निकायमा समावेशी गराउने राम्रो व्यवस्था हो (धारा २८३) । राजदुतहरुको नियुक्ति पनि समावेशी हुने सुनिश्चित गरेको छ (धारा २८२) । यो पनि सकारात्मक नै हेर्नु पर्छ ।

अधिवक्ता दिपेन्द्र झा

नयाँ संविधान २०७२ ले के दियो ? के दिएन ?


नयाँ संविधान २०७२ ले के दियो ? के दिएन ?

10922531_10155151206265385_257591261808540934_nनयाँ संविधानले गणतन्त्रलाई संस्थागत गर्यो । संघियतालाई स्वीकार गर्यो र धर्मनिपेक्षलाई अंगिकार गर्यो (धारा ३) । प्रस्तावनाले बहुजातीय, बहुभाषिक, बहुधार्मिक, बहुसांस्कृतिक तथा भौगोलिक विविधतायुक्त विशेषतालाई आत्मसात् गर्यो । वर्गीय, जातीय, क्षेत्रीय, भाषिक, धार्मिक, लैंगिक विभेद र सबै प्रकारका जातीय छुवाछूतको अन्त्य गर्ने अठोट गर्यो । समानुपातिक समावेशी र सहभागितामूलक सिद्धान्तका आधारमा समतामूलक समाजको निर्माण गर्ने संकल्प गर्यो (प्रस्तावना)। तर मौलिक हकको धारा ४२ मा समावेशी सिद्धान्त मात्रै राखियो, समानुपातिक छाडियो । यसरी समाजलाई समानुपातिक समावेशी बनाउने तर राज्यलाई समावेशी मात्रै बनाउने प्रावधान राखेको देखिन्छ ।
अन्तरिम संविधान २०६३ को धारा २१ समानुपातिक समावेशी राज्य भनेर सुनिश्चित गरी सकेको मौलिक हकलाई नयाँ संविधानको मौलिक हकको धारा ४२ मा समानुपातिक अटाउन सकेन । नयाँ संविधानले झण्डै ४० वटा मौलिक हकहरुको व्यवस्था गर्यो तर अधिकांश कानुन बमोजिम उपभोग गर्न पाउने व्यवस्थाले कानुन नबन्दा सम्म त्यो हकको उपभोग गर्न पाउने कि नपाउने भन्ने प्रश्न अनुत्तरित नै रह्यो ।
नागरिकतामा आमा वा बाबु त गर्यो तर नेपाली महिलाले विदेशी पुरुषसँग विवाह गरेमा बाबुले नेपालको नागरिकता नलिँदासम्म बंशजको आधारमा नागरिकता नपाउने भयो (धारा ११(७) । त्यस्तै नेपाली पुरुषले विदेशी महिलासँग विवाह गरेमा महिलाले संघीय कानून वमोजिम अंगिकृत नागरिकता पाउने प्रावधान राखेको छ । जुन अन्तरीम संविधान कै निरन्तरता हो । अव हेर्रौ संघीय कानून कस्तो बन्छ त्यसमा भर पर्ने भयो । संघीय कानून बन्ने बेलामा फेरी विवाद र संघर्ष गर्नु पर्ने हुन्छ । त्यसैगरी राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री, प्रधानन्यायाधीश, प्रतिनिधि सभाका सभाभुख, राष्ट्रिय सभाका अध्यक्ष, प्रदेश प्रमुख, मुख्यमन्त्री, प्रदेश सभाको सभामुख र सुरक्षा निकायका प्रमुखको पदमा वंशजको आधारमा नेपालको नागरिकता प्राप्त गरेको हुनुपर्छ (धारा २८३)। भनेको मतलब कुनै नेपालीले विदेशी नागरिकसँग विवाह गरी अंगिकृत नागरिकता पाएका नेपाली नागरिकहरु ती पदमा पुग्न सक्दैनन । यो बाहेक अन्य संवैधानिक निकायको पदमा पुग्न समेत अंगीकृत नागरिकता प्राप्त गरेको व्यक्तिको हकमा कम्तीमा पाँच वर्ष नेपालमा बसोबास गरेको हुनुपर्ने प्रावधान राखेको छ ।
आदीवासी जनजाती, मधेशी, मुस्लिम, थारु आयोगहरु बन्ने भयो । जुन कुरा धारा १६१, १६२, १६३, १६४ मा राखिएको छ तर २६५ मा यी आयोगहरुलाई १० बर्ष पछि संसदले पुनरावलोकन गर्न सक्ने प्रावधान राखेको छ ।
अन्तरिम संविधानको धारा ६३(३) ले मधेशमा जनसंख्याको प्रतिशतको आधारमा दिएको निर्वाचन क्षेत्रको अधिकार नयाँ संविधानको धारा ८४ ले हटायो । अहिले भूगोल र जनसंख्या भनेर राखेको छ । यही सिद्धान्तलाई अवलम्बन गर्ने हो भने प्रत्यक्ष तर्फ १६५ सिटमा आधा जनसंख्या भएको मधेशमा ६५ सिट र पहाडमा १०० सिट सुनिश्चित छ । यसरी खाइपाई आइरहेको अधिकार समेत खोसिएको छ । यसकारण प्रतिनिधिसभाको प्रत्यक्ष तर्फ रहेका १६५ सिट मध्य अन्तरीम संविधानमा जस्तै मधेशको जनसंखयाको प्रतिशतको आधारमा ५० प्रतिशत सिट छुट्टाउनु पर्दछ (कणार्ली, मनाङ जस्ता भौगोलिक विकटता भएको १२ वटा जिल्लाको हकमा न्युनतम एक सिटकोप्रावधान राख्न सकिन्छ )
त्यस्तै समानुपातिक समूहको संख्या बढाइएको छ । समानुपातिक तर्फ ११० सिटमा झण्डै ८२ सिट महिलालाई जाने भयो । बाँकी रहेको सिटलाई ८ वटा समुहमा बाड्न प्राविधिक हिसाबले पनि कठिनाई हुन्छ । साथै दलित समुदायबाट १ जना भन्दा बढी समानुपातिक सिटबाट आउन सक्ने संभावना छैन । मधेशी दलितको झन कुरै नगरौं । समानुपातिक निर्वाचन प्रणालीको कोटा कसका लागि हो ? प्रत्यक्षमा आउन नसकेका लागि होइन र ? बिगतको ६ वटा निर्वाचनलाई हेर्ने हो भने प्रत्यक्षमा खस आर्यका पुरुषहरुले कम्तीमा पनि ५५% जितेका छन् प्रत्यक्षमा आउन सक्नेलाई फेरी समानुपातिकमा किन चाहियो ? समानुपातिक दिने नै हो भने खसआर्य भित्रका दलित र महिलालाई दिनु पर्ने गरी राखेको भए हुन्थयो ।
राष्ट्रिय सभा (धारा ८६) मा १५ लाख जनसंख्या हुने प्रदेशको पनि ८ जना, २० लाख हुनेको पनि ८ जना, ३० लाख हुनेको पनि ८ जना बराबर भाग लगाइएको छ । यसमा पनि जनसंख्याको आधारमा सुनिश्चित गरिएको छैन । भारतमा सिकिम्म अरुणाचल प्रदेश, गोवा बाट एक जना र युपीबाट ३१, विहारवाट १६ माहाराष्ट १९ जना राज्य सभामा प्रतिनिधित्व हुन्छ । राष्ट्रिय सभामा पनि न्युनतम प्रत्येक प्रदेशबाट एक जना सदस्य हुने गरी र बाँकी जनसंख्याको आधारमा हुनु पर्ने हो । ३ जना महिला, १ अपांग र १ दलित प्रत्येक प्रदेशबाट अनिवार्य गरेको छ, जुन राम्रो पक्ष हो तर राष्ट्रिय सभाको ५९ सदस्य मध्ये मधेशी, थारु १० देखि १२ जना भन्दा बढी आउने कुनै सम्भावना छैन । राष्ट्रिय सभाको सदस्यको निर्वाचन प्रदेश सभाका सदस्य र स्थानीय निकायको प्रमुख र उपप्रमुख मतदाता रहने गरी निर्वाचन हुने व्यवस्था छ । जुन एकल संक्रमणीय व्यवस्था रहेको छैन । राज्य सभा, प्रतिनिधिसभा र प्रदेश सभामा समेत जनसंख्याको आधारमा समानुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चितता गर्नको लागि संसोधन आवश्यक छ ।
नेपाली सेनामा महिला, दलित, आदिवासी, जनजाति, खस आर्य, मधेशी, थारू, मुस्लिम, पिछडा वर्ग तथा पिछडिएको क्षेत्रका नागरिकलाई समानता र समावेशी सिद्धान्तको आधारमा प्रवेशको व्यवस्था गरेको छ (धारा २६२) तर मधेशहरुको समानुपातिक र मधेशी मोर्चासँग भएको ८ बुँदे सम्झौता अनुरुप सामुहिक प्रवेशको व्यवस्था गरेको छैन ।
सरकारी सेवामा समानुपातिक समावेशीको आधारमा पद पुर्ति गर्ने कुरा राखेको छ (धारा २८०) । संवैधानिक निकायमा समावेशी गराउने राम्रो व्यवस्था हो (धारा २७८) । राजदुतहरुको नियुक्ति पनि समावेशी हुने सुनिश्चित गरेको छ (धारा २७७) । मन्त्रिपरिषद पनि समावेशी हुने सुनिश्चितता गरेको छ ।
नेपालमा तीन तहको संरचना हुने संघ, प्रदेश र स्थानीय भनेको छ तर धारा ५६(४) ले माथि तीन तहको संरचनासँग बाझिने गरी जिल्ला सभा पनि राखेको छ ।
न्यायपालिकाबाट संवैधानिक अदालत हटाइ संवैधानिक इजलासको व्यवस्था गरिएको छ । तीन तहको संरचना भनिए तापनि जिल्ला अदालत भनि नामाकरण गरिएको छ । न्याय सेवा र न्याय परिषदको अगाडी संघीय शब्दावली हटाइएको छ । न्यायपालिकामा समावेशी कतै परेको छैन र सबै न्यायाधीशको नियुक्ति संघीय न्याय परिषदले गर्ने व्यवस्था गरेको छ । यस कारण प्रादेशिक कानुनु बमोजिम प्रत्येक प्रदेशमा प्रादेशिक न्याय परिषदको व्यवस्था गर्नुपर्ने प्रावधान राख्नु पर्छ । जिल्ला अदालतको सट्टामा स्थानीय अदालत संसोधन गर्दा राम्रो र स्थानीय अदालतको संख्या र न्यायाधीशको संख्या, न्यायाधीश नियुक्ति र सरुवा, बढुवाको प्रावधान प्रादेशिक कानुन बमोजिम राख्नु पर्छ ।
संघियता सम्बन्धी समस्या समाधान गर्न संघियता आयोग र भाषा सम्बन्धी समस्या समाधान गर्न भाषा आयोगको व्यवस्था गरेको छ । निर्वाचन क्षेत्र निर्धारण आयोगले २० बर्षमा निर्वाचन क्षेत्रको पुनरावलोकन गर्ने व्यवस्था राखेको छ (धारा २८१(१२)) ।
लोक सेवा आयोग, राष्ट्रिय मानवअधिकार आयोग, महिला आयोग, दलित आयोग, मधेशी आयोग, मुस्लिम आयोग, अख्तियार दुरुपयोग अनुसंधान आयोग लगायतका संवैधानिक आयोगहरु प्रादेशिक स्तरमा समेत राखिनु पर्ने संसोधन प्रस्ताव तयार गर्न आवश्यक छ ।
सिमांकनमा ७ प्रदेशको खाका राखिएको छ तर प्रदेश नं. २ मा झापा, मोरंग, सुनसरी परेको छैन । प्रदेश नं. ५ मा तराईका नवलपरासी (बर्दघाट सुस्ता पश्चिम), रूपन्देही, कपिलबस्तु, दाङ, बाँके, बर्दियालाई पहाडको पाल्पा, अर्घाखाँची, गुल्मी, बाग्लुङ (पश्चिम भाग), रुकुम (पूर्वी भाग), रोल्पा, प्यूठानसँगै राखिएको अवस्था छ । श्रोतको हिसाबले राम्रो मानिएको नवलपरासीको बर्दघाट सुस्ता पुर्वको भागलाई प्रदेश नं. ४ मा राखिएको छ । प्रदेश नं. ७ मा कञ्चनपुर र कैलालीलाई बाजुरा, बझाङ, डोटी, अछाम, दार्चुला, बैतडी, डडेल्धुरासँग राखियो ।
सबैभन्दा महत्वपुर्ण कुरा मधेशी, थारु, मुस्लिम लगायतले यो संविधानमा आफ्नो स्वामित्व अनुभूत गर्न सकेका छैनन । प्रक्रियामा सामेल भइ हस्ताक्षर गर्न सकेको छैनन र एक महिनामा झण्डै ४२ जनाको ज्यान गयो । यसकारण अधिकत्तम लचकता देखाई संशोधनको विकल्प छैन । नयाँ सरकार बन्नु भन्दा अगाडी नै यस्ता विवादित र मधेशी, थारु लगायतका सिमान्तकृत समुदायको हक कटौती गर्ने धाराहरुको संशोधान आवश्यक छ । आन्दोलित समुदायहरु सधैं मूलधार प्रक्रियाबाट बाहिरिने खतरा विद्यमान छ । यसकारण वार्ता मार्फत तत्काल संसोधनका लागि प्रस्ताव तयार गरियोस्.

नोट- यहाँ रातो अक्षरमा लेखिएको शब्दले बिशेष महत्व राख्छ, ध्यान ले पढ्नु होला .

यो पोस्ट अधिवक्ता दिपेन्द्र झा को फेसबुक बाट लिएको हो .

BBC नेपाली सेवा काठमाण्डुलाई मधेसबाट जोगिन्दरको पत्र !!


BBC नेपाली सेवा काठमाण्डुलाई मधेसबाट जोगिन्दरको पत्र !!

जोगिंदर

साहेब, होस नभएको नभन्नु होला । पुरापुर होस् हवासमै छु । म जोगीन्दर, घर सर्लाही , आमा पस्मिना देबी र पीता पन्नालाल । बहुत कुछ भएको छ मधेसमा ।  हाम्रो पहेचान जो छ त्यो खोसिएको छ भन्ने खबर जो आएको छ । तो हामी नेपालको मनुवा होइन की जस्तो लाग्दैछ । कुरा बुझे छैन । मधेश वन्द छ । वन्द जो छ ,यो सव वेहाल वनाएको छ । गाडीचले छैन स्कुल वंद छ ,पेट बन्द नभए पनि काम जो छैन , त्यसकारण हामी दिनहु जुलुसमा जान्छु । जुलुसमा जो छ , कहिलेकाहि खानाको वन्दोवस्त हुन्छ् । तँछाड मछाड गर्दै खायो र जुलुस लायो । मानिस जो छ , भिड देखे पछि हामी गाउलेहरुलाई जोस चलिहाल्छ । जोस्सिए पछि के हुनु ,हामी कर्फू तोड्न जान्छु । सिकाउन त सिकाउँछ हामरो गाउँको नेताले , डागडुग पारेर हिड्ने भन्छ । तो हामी जुलुसको पछाडी वसेको मान्छे ,डागडुग पारेर फर्किन नपाउदै पुलिस आउँछ र ठोकी हाल्छ । यो ठोक्ने पुलिस हाम्रोमा नपठाउ भन्न मिल्दैन भनेर नेतालाई भनेको ,यसैले त आन्दोलनलाई सहयोग पुगीराँछ भन्छ । म कुरो वुझेछैन । जे होस पुलीसले वेस्मारी हान्छ ।अलि अलि लठ्ठी घुमाउन जो जाने छु , यसकारण पुलिसको पीटाइ खाएको छैन ।त्यो सेतो धुँवा जो छ टियर गैस ओ तो वहुत पोल्छ , आँसु र सिगान एकै पटक । जुलुसमा जति आँशु आएछ नी त्यतिका त अहिले सम्म रुँदा पनि झरे छैन । मधेशको पुलीस साह्रै अत्यचार गरीराँछ । हामरो गाउँको वकिल भन्छ कम्मर माथी गोली हान्न कानुनले दिदैन तर पुलीस टाउको ताकी ताकी ठोक्छ । मान्छे जो मरेछ त्यो जुलुसको भन्दा रमिता हेर्ने वढी परेको छ । पुलीसले यति सारो नगरे थियो भने जनता यति विधी जुलुसमा आउदैनथ्यो । पुलीसको कारण आन्दोलन गर्माइराछ । वामदेवको आदेश भन्छ ।जनता मार्न आदेश दिने काम ठिक भएन, हामरो कुरा पनि सुन्न परो नि । हामीले के भनेछु हामी मधेशी हामरो पहेचान देउ हामी आन्दोेलनमा जादैन । पहेचान भनेको ठुलो कुरा हो भन्ने वुझेछु । यसले नै हामरो पुर्खाको सम्मान मिल्छ भन्छन ।यत्तिका दिन सम्म पुर्खालाई गतीलो पीन्न दिन नपाएको , सन्मान मिल्छ भने किन नलडने भन्ने हामरो कुरा छ ।

एक महिना लामो आन्दोलन हँुदा कस्तो हुन्छ भन्ने कुरा सायद काठमाण्डौले वुझेछैन । घरमा नुन छैन पसल खुल्दैन । दुवैतिरवाट जनता मारमा छ । आन्दोलनकारीको वन्द संग कर्फुु जोडिएकै छ ,कर्फु नभएको भए राती भएनी पसल त खुल्थो नि। सरकार हामीलाई नुन पनि नखा भन्छ । यो त अत्यचार नै भो नि । हामरा आन्दोलनकारी नेतालाई वार्तामा वसाल्न किन नसकेको ? कुरो गर्नु परो । आन्दोलन लाम्विदै जाँदा मधेशी नेताको काठमाण्डौ भन्दा विहारको पटना तिर पो विस्वास वढे जस्तो लाग्छ । अस्ति प्रचण्डले गरेको भाषण हामीलाई पनि मन परेको छ, काठमाण्डौ हामीले पनि वनाएको हो , तर वनाए जस्तो पनि त गर्नु परो नि । कालो मान्छे सवै भारतिय हुन जस्तो गर्छ काडमाण्डु ,यो हामीलाई ठिक लागे छैन । यहाँको सिमाना कस्ले वचाएको छ ,हामीले । भारतीय दादागीरी वाट सास्ती कस्ले भोगेछ ,हामीले । हामरो चेलीवेटी माथी कस्ले नराम्रो नजर लाएछ, त्यतैकाले । हामीले यत्तिका सहीराखेको छु के का लागी । काठमाण्डुले हामीलाई एउटा नागरीकता वाहेक के दिएछ ,छैन । तर हामी नेपाली हुनुमा गर्व गर्छु । हाम्रो यो देशकालागी गरेको योगदानलाई काठमाण्डुले आभार पनि दिदैन । हामी नेपाली हो की होइन ?किन हेला गरेको कालो देखेर ? हामरो छाला कालो ,मन सेतो । काठमाण्डुको छाला सेतो भएर पनि मन कालो । हामीको चित्त यहि भएर दुखेको । संविधान बनाउने कुरा नराम्रो भने छैन । यस्मा हामरो कुरा पनि त हुनु परो कुरो यत्ति हो । संविधानमा हामरो कुरो नभए, हामी कहाँ जाने ? यहाँका नेताले आजकल अर्कै देश वनाउन पो पर्छ कि भन्ने कुरा गरेको भन्ने सुनेको छु ,यो नराम्रो भयो । हामीलाई यो कुराले रुलाएको छ । यसो नगर ,हामी कम पढेको मानिस कुरो त्यति वुझदैन तर नेपाललाई टुक्राउन भने मिल्दैन ,यहि हाम्रो सोचाइ हो । मधेशको आन्दोलन आजकल दुविधामा छ ,के गर्ने संकट छ, काठमाण्डुले यस्लाई छिट्टै वुझोस । जनकपुरमा मानिस जो शवयात्रामा आए तिनीहरु कतै वाट मगाएका होइनन । विरगंजको त कुरै नगरौ वाफ रे वाफ मानिसको समुन्दर । ति मानिसको कुरा राज्यले मान्न पर्छ कि पर्दैन ? उनिहरुको कुरा ठुलो छैन । पहेचान चाहीयो र प्रदेशको सिमा मिलाउनु परो । कुरा यत्ति हो , त्यो के छ ,मधेशको सिमा मिलाउने कुरा संघिय आयोगलाई दिए हुन्छ भन्ने गच्छदारको कुरा पनि नराम्रो होइन । काठमाण्डुले यत्ति पनि किन हुन्छ भन्न नसकेको । प्रचण्ड प्रति हामीको विस्वास थियो ,वार्ता गराउने कुरा पनि गरेको समाचार सुनेथे । तर त्यति ठुलो नेताले पनि वार्ता गराउन नसकेकोमा हामीलाई चिन्ता लागेको छ । हामरो तिर आन्दोलन शन्तिपुर्न छ । पश्चिममा पुलिस पनि मारीएका थिए ,हामीकोमा जनतामात्र मारीएका छन । त्यसकारण यो आन्दोलन शान्तिपुर्न छ भन्न मिल्छ । हामीकोमा आजकल पहाडिया र मधेशी लडाउने प्रयास गर्न थालिएको छ ,यसो भयो भने नराम्रो हुन्छ । मधेशका नेताले विहारमा शरणर्थी शिविर वनाएर आएकाछन रे । यो वडो दुखको कुरा छ । त्यो शिविरमा को जाने ? किन जाने ?? पहाडिया पहाड तिर जालान हामी विहार तिर ,यो अस्विकार्य छ ।

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हामीको के गल्ती हो त्यो भन्नु परो , होइन भने विहारमा हामीलाई लखेटने वातावरण कस्ले वनाउन लागेको हो त्यो कुरो वुझाइदिनु परो । हामी मिलेर वसेका छौ यत्ति हो हामीलाई यो देशको सन्मानित नागरीकको दर्जा चाहियो । हामीलाई यो देशको संरक्षण र सम्वधन चाहियो । आफ्नो नागरीकको नागरीक अधिकार दिन नसक्नेलाई देश भन्न मिल्दैन । हामी आफ्नै देशमा शरणर्थिको भुमीकामा वस्न सक्दैनौ । ढिलै होस वन्दै गरेको संविधानमा हामीलाई पनि समेट । पारीत भएकै संविधानमा हामीलाइ संवोधन गर्न नसकिएला तर यस्को पहिलो शंसोधन हुँदा हाम्रा माग पुरा गर्न सकिन्छ ।त्यसो भए हामी संविधान घोषणा हुने दिन दिपावली गर्ने छौ । इतिहासको यो सुनौलो अवसरमा सहभागी हुने हाम्रो हकलाई अपहरण नगर । काठमाण्डौले दिपावली गरीरहदाँ मधेशमा आगो लायो भने त्यसले देशलाई कुँजो वनाउछ । हामीलाई अर्नगल वलिदानीका लागी नउक्साउ । हामी हाम्रो रगत, यो देशको तक्दीर वदल्न खर्च गर्न चाहन्छु । हामीलाइ यो अवसर दिइयोस । काठमाण्डौलाई भाइ वनाइयोस पराया होइन ।

जोगीन्दर यादव, सर्लाही

नेपाली राजनीतीज्ञय हरुलाई एक मधेसी छोरोको पत्र !


नेपाली राजनीतीज्ञय हरुलाई एक मधेसी छोरोको पत्र !

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श्रीमान सम्पूर्ण डेढ़(१-१/२)अक्षरे बुद्धि भएका नेतागण महोदय,

नेपाल का सम्पूर्ण नेता ज्यू हरुलाई देश को यथास्थिति को लागी साष्टांग दण्डवत | हाम्रो देश नेपाल लाई आपनो पार्टी को जस्तै फूटाउन लागेको मा असहमति जनाउदै हार्दिक बिरोध गर्दछु | सर्बप्रथम म लाई नेपाली बाट मधेसी मा झारेको मा धेरै धेरै धन्यबाद ज्ञापन गर्दछु | पहिला म नेपाली हुन मा गर्ब गर्थे अब हजूर हरुको बर्गिकर्ण अनुसार म एउटा मधेसी भए | म एउटा मधेसी भएको नाता ले मधेस मा हजूर हरु को ताण्डव देखेर मलाई पनि श्री पशुपति नाथको शंकरिय रूप जस्तै शस्त्र बिभुषित भएर नटराज नाच देखाऊन मन लागेको थियो तर हाम्रा बुढापाका भन्छन सयंम र धैर्य जीवन का अमूल्य सम्पति हुन र भूकी रहेको कुकुर माथी तिमी भुकनु भनेको तिमी पनि कुकुर नै बन्न खोजेको रे | त्याही भएर म एउटा मधेसी हजूर हरुले राखेको उप नाम (धोती, मधेसे, भेले, मर्सिया ) बुद्ध जन्मेको शांत देशमा शांतिपूर्ण तरीकाले यो बिनती पत्र सम्पूर्ण बुद्धिहिन नेता बर्ग समक्ष पुर्याउन चाहेको हो | देशका सम्पूर्ण अगुवा तथा पथभ्रस्ट नेता ज्यू हरुको सेतो बाल्मिकीय इतिहास सयदै कोई नेपाली होला जसलाई थाहा छैन होला तै पनि मुटु माथि ढुंगा राखी यस देशको शासन हजूर हरु जस्तो दुशासन भेषी नेता हरुको हात मा दिनु नेपाली जानताको लागी दुर्भाग्यपूर्ण बिबसता नै हो |

स्वर्गको घमण्डी राजा ईन्द्र मदिराको स्वाद लिदै स्वर्ग सुंदरी हरुको नृत्यमा सधै रमाई रहनेको घमण्ड पनि कहिले एउटा मानव द्वारा त कहिले एउटा दानव द्वारा बारम्बार ध्वस्त पारीएकै हो | ईन्द्रीय जीवन बिताई रहेका हाम्रा कुनेत्री नेता ज्यू हरुको घमण्ड लाई थारुवान को घटना, जानताको शक्ति प्रदर्शन तथा मधेसको आन्दोलन ले तुलना गर्दा हुन्छ | आई परेको बेला इन्द्रले भागवान शंकर गुहार्थे तर नेपालको राजनीतीज्ञय संस्कृति छिमेकी रास्ट्र गुहार्नु हो | शुशील कोईराला एवम मोदी जी को दूरभाष बर्तालाप यसको उदाहरन पनि हो | आपना घर सम्म सम्हार्न न सकने हाम्रा देश का देश बर्बाद पर्ने बिषय मा बिधा बारिधि हासिल गरेका प्रचण्ड रूपी नेता हरु देश सम्हार्न आगुवा बने पछि देश मा भाग बन्डा न लागे के हुन्छ ? आफ्नै देश का जानता लाई बिहारी हुन भन्ने जस्तो अपशब्द को बाण जानता को छाती मा प्रहार गर्नुले देश लाई बिखण्डन बाटो मा डोर्यौउनु स्वभावीकै हो | नेपाल मा जन्मेकी राजा जनक की छोरी सीता या राजा शुद्धोदन का छोरा बिश्व मै शान्ति का प्रतिक मानिने भगवान बुद्ध बचेको भए र माहाभारत को धनुधर मानिने भीष्मपितामह को जस्तो इक्षा मृत्यु प्राप्त भएको भाए आज आफ्नो देश को यो दुर्दशा देखेर उहा हरु आपनो इक्षा ले नै प्राण त्याग गर्थे होला|

“अल्प बुद्धि बिनाशकाले ” अर्थात हाम्रा प्रिय, युवा एवम असक्षम प्रधानमन्त्री शुशील कोईराला | देश को लागी समबेदनशील पद मानिने प्रधानमन्त्री जो अहिले सम्म दश कक्षा पनि पास गर्न सकेका छैनन | उहा हरुको नियमानुसार देशका जानताले सवारी चालाक अनुमति पत्र लीन मापदण्ड पूरा गर्नु पर्ने अर्थात दश कक्षा उतीर्ण हुनु पर्ने तर देश चलाउन कुनै मापदण्ड न हुने | हाम्रा देशका गृहमन्त्री बाम देव गौतम ज्यू ले कम्युनिज्म को राम्रै ज्ञान हासिल गर्नु भा का रहेछन | नेपाल को थारुवान घाटना र देश भरी सेना परिचालन द्वारा उहा ले आपनो असफल कम्युनिज्म को प्रयोग जानता लाई देखाउनु भो जसले गर्दा लिम्बुवान ले थारुवान र मधेसी आन्दोलन संग एक्याबद्द्ता जानायो र सेनाले राजनितिक घोषणा द्वारा समस्याको समाधान गरियोस नत्र नियन्त्रण गुम्न सक्छ जबाब फर्कायो | जसले भैसासुर माथी बिराजमान यम रूपी हाम्रा गृहमन्त्री ज्यू को असक्षमता उजागर गर्दछ | नेपालको राजनीतक परम्परा अनुसार नैतिकता नै न भएका माहापुरुष हरुले नैतिक को आधार मा पद त्याग गर्नु पनि उचिंत मानीदैन |

नेपाल देश मधेसी, थारू, जनजाति, दलित, पहाड़ी या अन्य जाती तथा बर्ण भएर बिग्रेको होईन | देश बिग्रिनु भनेको एउटा असल र सच्चा नेतृत्व गर्ने नेतृत्वकर्ता नभएर बिग्रेको हो | देश एउटै भए पनि मधेसी, जनजाति, दलित तथा पहाड़ी बर्ग लाई संबिधान मा छुटाछूटै नियम कानून बनाउनुको परिणाम नै मधेसको आन्दोलन र थारुवानको घटना हो | सासकीय बर्ग ले बानाएको नियम कानून नै आज देश मा नेपाली लाई बिभिन्न बर्ग मा बिभाजन गरेर नेपाली बाट देश मा मधेसी, थारु, दलित या जनजाति जनमाएको हो | मरेको लाश माथि पनि राजनीती को खेल खेलने हाम्रा देश का दानव स्वरूपी सम्पूर्ण राजनीती कर्मी हरुलाई म एउटा मधेसी छोरो को बिनम्र आग्रह छ की राजनीति लाई यस्तो घृणित पेशा नबानाउनु की भोली देखि युवाबर्ग हरु राजनीति पेशा देखि घृणा गरुन र टाढा बसून या आफ्नो मातृभूमि को रक्षा हेतु सत्ता पिपासु हरु बाट बचाउन का निमित शसस्त्र द्वन्द को बटो मा लागुन | सम्पूर्ण नेता हरुलाई चेतना भाया | हे देश का नेता हो आकाश माथी मुख फर्काएर न थूक, फर्केर तिम्रै मुख मा आउछ |

अशोक कुशवाहा

बीरगंज

भोजपुरी रामायण पर एक नजर


भोजपुरी रामायण पर एक नजर

 

गोपाल ठाकुर
गोपाल ठाकुर

ओमप्रकाश जायसवाल, वीरगञ्ज के प्रकाशन में मुकुंद आचार्य भानुभक्तीय रामायणको भोजपुरी अनुवाद भोजपुरियन के बीच में लेआइल बाड़न । यह ‘भोजपुरी रामायणः भानुभक्त रामायण के भोजपुरी अनुवाद’ खातिर अनुवादक आचार्य र प्रकाशक जायसवाल दूनू जने बधाई के पात्र बानी । २०६३ साल में एकर प्रकाशन पूरा भइल बा । ई पहिल संस्कारण ५०१ प्रति छपाइल बा । राज्य भा राज्य प्रायोजित कौनो संस्था अगर एकरा खातिर आगा आइल रहित त आउर अधिक प्रति छपा सकत रहे । खैर जे होखे, अनुवादक आ प्रकाशक दूनू जने के निजी प्रयास एह दिसाईं प्रशंसनीय बा । ई ‘नेपाली’ समाज के भोजपुरी समाज में कुछ हद तक आधिकारिक रूप में परिचित करावे में मदत कइले बा त एकरा माध्यम से भानुभक्त के भोजपुरी समाज में प्रवेश मिलल बा ।
निश्चित रूप से अनुवाद अपनेआप में एगो बहुत झंझटिआह आ अपजसी काम बा । अनुवाद के विद्वान लोग एगो अइसन भंसार से तुलना कइले बा जहाँ असावधानी भइला पर बहुतो अबैध सामग्री लक्ष्य भाषिक समुदाय में घुस सकता । त आचार्य के अनुवाद कृति के रूप में आइल ई भोजपुरी रामायण भाषिक, शैलीगत, विषयगत आदि दृष्टिले कइसन बा त ? तनिका विचार कइल जाओ ।
१. भाषा
भाषा के दृष्टिकोण से ई रामायक नेपालीय भोजपुरी के केंद्रीय भा मानक भाषिका अर्थात्‌ कलैया-वीरगंज के भाषिका में अनुदित बा । एकरा बादो अनुवादक संस्कृत, ‘नेपाली’ आ हिंदी के शब्दन के भी कइयन ठाँव में भोजपुरी पर पइँचा लाद देले बाड़न । ओतने ना, एह रामायण के अंतिम पृष्ठ में तुलसीदास के रचना ‘रामचरितमानस’ में प्रकाशित रामायण के आरती जइसन के तइसने छापल बा । कम से कम अनुवादक के ई असावधानिए काहे ना होखे, भोजपुरी समाज में तुलसीकृत रामचरितमानस के प्रभाव के झलकावेला ।
१.१ संस्कृत शब्द
अर्थे ना बुझाए के हिसाब से एह कृति में भोजपुरी में ‘खिर्ह’ भा ‘तस्मई’ के जगे ‘पायस’ के प्रयोग के भोजपुरी समाज प्रसङ के आधार पर मात्रे बुझी । ओही तरे भोजपुरी में ‘असापत’ भा ‘गाभिन’ प्रचलित रहला का बादो एह अनुवाद में ‘गर्भिणी’ के ही प्रयोग कइल गइल बा ।
१.२ ‘नेपाली’ उच्चारणका आधार पर अर्थ के अनर्थ होखेवाला हिज्जे के प्रयोग
प्रचलित भोजपुरी प्रयुक्त शब्द अर्थ
तइयो तहियो ओहू दिन
गावेवाला गाएवाला गाईवालाramayan
पर मा, भित्र में
बाड़ी बारी बारी
चिन्हके चिनके चीन देश के
पर्थन पर्शन परोसन
छहिंड़ी छयारी निरर्थक
सँसरत घसरत रगड़त
लेखे लेखा जइसन
पोता नाती बेटी के बेटा
छन छिन जबर्दस्ती लेहल
गावे लागल गाए लागल गाई दुहे देहलख
बैताल बेताल तालबिहीन
३.६.१.३ अर्थ ना बिगड़ला के बादो नेपाली प्रभावित उच्चारण के आधार पर अस्वीकृत हिज्जे
प्रयुक्त हिज्जे स्वाभाविक हिज्जे
जनाएवाला जनावेवाला
मनाएवाला मनावेवाला
पिपल पीपर
नारही ना रही
जोडतानीं जोड़तानी
अन्तरधान अंतरध्यान
रहिअ रहिहऽ
बुढउ बुढ़ऊ
होइअन होइहन
पहिचान पहचान
हिरिस हिलिस
चाँदी चानी
लरिकाहीं लड़िकाईं
उहे में ओही में
धौड़ल धउरल
बुलाउ बोलाईं
बिहौलन बिअहलन44707330c05b8bf7ae99c8e2075af69d_RamayanaWarAgainstEvil_256x256_logo
दोसरा दोसर
घोलल घोरल
जले लागल जरे लागल
इहे से एही से
चौधे चउदे
उलट उलिट
गाली गारी
नाजाई ना जाई
छोडेके छोड़ेके
खड़ाव खड़ाँव
भालू भाल
जाती जाति
टुक्रा टुकड़ा
जहिय जइह
समझौवली समझवली
जाएला जाला
ताल ताड़/तार
संशा दुबिधा
गडल गड़ल
खूटा खूँटा
ओटिआएलागल ओटिआवे लागल
चिनासी चिन्हासी
छदाई बकोराई/कय
खम्बा खाम्हा
मिटाके मेटाके
मुआए मुआवे
बोकहिया बकइया/बोकइया
कहिअ कहिहऽ
अँगूठी अउँठी/औँठी
तीनो तीनू
पाए पावे
खड़अइलन खड़िअइलन
इहे बीच एही बीच
कहिए कहिहे
सुनहिए सुनइहे
दशो दसू
सोन सोन्ह
ढोंड़ी ढोंढ़ी
चारो चारू
खड़ाउँ खड़ाँव
गाये गावे
रितुदान रत्तीदान
गाज में गाढ़ में
जहिअ जइहऽ
उहे लेखा ओही लेखा
बिताई बितावे
१.४ हिंदी शब्द के प्रयोग
प्रयुक्त हिंदी प्रचलित भोजपुरी
रस्सी रसरी/लसरी
है ह
उमर उमीर
हिरन हरिन
मछली मछरी
खदेरलख खहेरलख
इतराता नितराता
मुगदर गदा
लहूलुहान लेहू-लेहुआन
नींद नीन
उपर देखावल गइल त्रुटियन के अलावा सकारात्मक संदर्भ में नकारात्मक प्रयोग के रूप में ‘खुशी में जनकपुर डुबल’ लिखल गइल बा । वास्तव में ‘डुबल’ हमनी के पूर्वीय परंपरा में शोक के प्रतीक ह । एतहाँ ‘खुशी में जनकपुर झुमल’ लिखल बेसी सांदर्भिक होई । ओही तरे भोजपुरी में दूगो शब्दन भा वाक्यन के जोड़े खातिर ‘आ’ के प्रयोग होला । ई अपनेआप में दीर्घ स्वर ह, बाँकिर एह में फेर से दीर्घता प्रयोग कके ‘आऽ’ लिखल गइल बा जौन जरूरी नइखे ।
२. शैली
भानुभक्तीय रामायण शास्त्रीय छंद पर आधारित बा । बाँकिर एह भोजपुरी रामायण के बारे में अनुवादक के अइसन अभिव्यक्ति ‘अनुवादक के कथनी’ कहके आइल बाः ‘छन्द के ज्ञान हमरा ओतना ना भइला से हम खाली अन्त्यानुप्रास मिलाके भावानुवाद कइले बानी ।’
अर्थात ई अनुवाद छंदात्मक ना होके तुकबंदी मात्रे ह । एकरा अलावा हरफ में वर्णात्मक संख्या भी मिलल नइखे । बल्कि गद्य कविता में ही अगर अनुवाद कइल गइल रहित त शायद एह से निमन होखित ।
३. विषयवस्तु
विषयवस्तु के बात कइला पर ई अध्यात्म रामायण के संक्षिप्त अनुवाद ह । भानुभक्त रामायण में जमाजमी १३१७ पद बा त अध्यात्म रामायण में ४२६८ पद । तुलनात्मक रूप में तुलसीकृत रामचरितमानस एकरा से बहुते विस्तृत बा ।
ई भोजपुरी रामायण भानुभक्तीय रामायण के हुबहु अनुवाद भइला से भानुभक्त के ‘नेपाली’ रामायण के बराबर पद एह में भइल वांछनीय होला । संदर्भ के बात कइल जाओ त माझी-राम संवाद प्रसङ रामचरितमानस में अयोध्याकांड में बा त एह रामायण में बालकांड में ही विश्वामित्र आ राम के जनकपुर यात्रा के क्रम में राखल गइल बाः
ख्वामित् ! ई दुइ पाउको अति असल् धूलो जसै ता पर्यो ।
पत्थर् हो त पनी मनुष्य सरिको सुन्दर् स्वरूपै धर्यो् ॥
तस्‌तै पाठ यहाँ भयो पनि भन्या डुङ्गा स्वरुप् धर्दछन् ।
डुङ्गाले पनि रुप् धर्या यदि भन्या हाम्रा जहान् मर्दछन् ॥९७॥ (भानुभक्त रामायण बालकाण्ड)
खेवैया एगो ठिटोली कइलख, प्रभु के पांव पकड़ के ।
अपने सुन्दर नारी बनौनी, पत्थर में चरण धरके ॥
वइसने लीला इहां करब त, हमर नैयाँ होई नारी ।
लइकन के मुँह में जाबी लागी, का कही घरवाली ॥९७॥ (भोजपुरी रामायण बालकाण्ड)
संदर्भ अलग भइला का बादो घटना उहे ह । बाँकिर एकरा बाद बनिहारी लेवे-देवेवाला प्रसङ के रामचरितमानस में उल्लेख बा जब कि भानुभक्तीय रामायण एह विषय पर मौन बा । एह प्रसङ के भोजपुरी समाज प्रमुखता के साथ गावेला । अर्थात गंगा हेलला का बाद राम माझी के बनिहारी के तौर पर कुछ देवे खातिर सीता के इशारा करेलन । सीता औंठी देवे के कोशिस करेली । बाँकिर माझी अपना के एह मर्त्यलोक के एगव नदी मात्र के खेवैया बतावत राम के भवसागर के माझी बतावेला आ एके पेशावाला लोग के बीच में बनिहारी लेवे-देवे के काम कइल ठीक नइखे कहत बनिहारी लेवे से इनकार करेलाः
नाई से ना नाई लेत केस के कटाई जी
धोबी नाही लेत कभी धोबी से धोआई जी
केंवट से केंवट ली काहे पार उतराई जी
लज्जित ना करीं अभी देके मजदूरी हमें
का होई लेके अभी पार उतराई जी
देके मजदूरी आपन जात ना बिगाड़ीं जी ।
हम इहाँ प्रभुजी के गंगा पार कइ देनी
करेम भव पार प्रभु घाट जब राउर आएम
ओही दिन बराबर होई पार उतराई जी
४. उपसंहार
सामंती राजशाही के आदर्श के रूप में राम के मर्यादापुरुषोत्तम बतावल गइल बा । एह विशेषण के पक्ष आ विपक्ष में बहस जारी बा, जारी रही भी । एकरा बादो भारतीय उपमहाद्वीप में रामायण सर्वाधिक भाषा आ संस्करण में उपलब्ध बा । रहल बात भोजपुरी के, त तुलसीकृत रामचरितमानस भोजपुरी समाज खातिर अनुवाद कके पढ़े के विषय ना रहल, ना बा आ ना रही । एकरा बादो मुकुंदजी भानुभक्तीय रामायण के भोजपुरी अनुवाद हमनी के सामने लेआइल बाड़न । ऊ निश्चित रूप से ‘नेपाली’ मातृभाषी होत भी उनकर कर्मभूमि भोजपुरिया क्षेत्र रहल बा । तइयो एह अनुवाद के लक्ष्य भाषा उनकर मातृभाषा ना भइला से उपर बतावल कुछ त्रुटी सब रह गइल बा । हँ, अनुवाद के प्रकाशन से पहिले भाषिक संपादन जरूरी होला जौन एह पुस्तक में नइखे लउकत । भविष्य में एह पर ध्यान पहुँचो । ना त गुँड़-गोबर-बतासा बनावल ठीक ना होई ।
वाणस्थली, महादेवस्थान-७, काडमाड़ो
भोजपुरी टाइम्स दैनिक, सावन १८, २०७२ में प्रकाशित ।

भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता के सवाल


भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता के सवाल 

गोपाल ठाकुर
गोपाल ठाकुर
विश्वभाषा भोजपुरी आज संसार में १३ करोड़ लोग के भाषा बा । भारत, नेपाल, मॉरीशस, फिजी, सुरिनाम, गोयना, टुबैगो, दक्षिण अफ्रिका, अष्ट्रेलिया, म्यान्मार, बंगलादेश, पाकिस्तान, अरब, अमेरिका आ यूरोप के कैयन देशन में भोजपुरिया लोग के बसोबास बा । हँ, एकर उद्गम के रूप में भारत आ नेपाले बा। एकरा बाद राज्य संचालन के हिसाब से मॉरीशस में भोजपुरिए लोग के शासन बा । फिजी में भी एक बेर महेंद्र चौधरी के सरकार बनल रहे बाकिर ओतहाँ के आदिवासियन के विरोध का सामने टिके ना सकल । एकरा बादो संवैधानिक रूप से मान्यता के जहाँ तक सवाल बा, ऊ अभी तक एकरा नेपाले में नसीब भइल बा । हँ, बेहवार में नेपाले में ई सर्वाधिक उपेक्षा के शिकार बा ।
जहाँ तक शिक्षा के सवाल बा, नेपाल में प्राथमिक आ माध्यमिक स्तर पर एकर पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तक आ सहायक सामग्री सहित अनौपचारिक शिक्षा में भी आपन पहुँच बना चुकल बा । भारत में उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद् आ विश्वविद्यालयन में ई स्थापित हो चुकल बा । मॉरीशस में शिक्षा मंत्रालय के तहत भोजपुरी के एगो विशेष निकाय के जरिए ही पाठ्यक्रम में सामिल करेके काम हो रहल बा । संचार माध्यम में नेपाल, भारत आ मॉरीशस में भोजपुरी सामिल बा । बाकिर नेपाल के अलावा एकरा अभी तक संवैधानिक मान्यता नइखे मिल पावल । हँ, अमेरिका में स्थानीय स्तर पर भोजपुरी में बनल कागजात के मान्यता मिलल बात अभीओतहाँ के भोजपुरियन के लेख-रचना के माध्यम से जानकारी में आ रहल बा ।

नेपाल के अंतरिम संविधान के धारा ५ में नेपाल के समूचा भाषा के राष्ट्रभाषा के मान्यता बा आ स्थानीय स्तर पर ओह सब में सरकारी कामकाज के वैध भी मानल गइल बा । भारत में संविधान के आठवाँ अनुसूची में सामिल भाषा के संवैधानिक मान्यता देहल मानल जाला । अभी एकरा खातिर ओतहाँ जोर-सोर से आंदोलन जारी बा । एतने ना, महाभोजपुर प्रांत निर्माण के बात भी उठ रहल बा । बाकिर एने फेसबुक संजाल आदि-इत्यादि के माध्यम से कुछ मित्र लोग के बात आ रहल बा कि संवैधानिक मान्यता खातिर हो रहल संघर्ष बेकार बा । कारण बतावल जाला नेपाल में बरकरार रहल एकर संवैधानिक मान्यता आ उपेक्षा दूनू के बेमेल अवस्था ।
 54एक तरफ से सोचला पर बात ठीके बुझाला । संविधान में लिखिए देहला से का होई ? अगर बेहवार में नइखे त झूठमूठ के संवैधानिक-कानूनी मान्यता खातिर लड़ल जरूरी नइखे, एह तर्क में भी दम बा । वास्तविक बात भी बा नेपाल के संदर्भ में । संवैधानिक भाषा भइला का बादो आज तक कवनो गाँव विकास समिति, नगरपालिका भा जिला विकास समिति में भोजपुरी में निवेदन लिखल देखल भा सुनल नइखे गइल । भोजपुरी में कौनो औपचारिक कागजात बनावल नइखे जात । एतने ना, सरकारी प्रायोजन में प्राथमिक आ माध्यमिक तह में एकर पाठ्यक्रम आ पाठ्यपुस्तक त बन गइल बाकिर कहीं पढ़ाई नइखे होत । मूल बात बा कि राज्य एह भाषा के विषय शिक्षक अभी तक कहीं नइखे रखले । संचार माध्यम के क्षेत्र में रेडियो नेपाल आ गोरखापत्र में नाम मात्र के जनशक्ति आ काम दिआइल बा एह भाषा खातिर । नेपाल टेलिभिजन में त अब तक समाचार सुरू भी नइखे भइल । त सवाल उठता, एकर संवैधानिक मान्यता मिलले आ नामिलले का ?

एही सवाल का सङे दोसरो सवाल उठ सकता, का अब तक कौनो नेपालीय भोजपुरिया कहीं कवनो स्थानीय निकाय में भोजपुरी में निवेदन देवे के साहस कइले बा ? कौनो भोजपुरिया गाँव विकास समिति के सचिव भा नगरपालिका के कार्यकारी अधिकृत का लगे केहू भोजपुरी में निवेदन लेके गइल बा ? भोजपुरी भाषा, साहित्य, संस्कृति आदि पर काम करेवाला संघ-संस्था का ओर से भी कौनो स्थानीय निकाय में भोजपुरी में पत्राचार भइल बा ? जिला स्तर के न्यायिक भा अर्धन्यायिक संदर्भ में केहू भोजपुरिए में आपन बात लिखवावेके कोशिस कइले बा ? आउर ना त साटा लिखेके काम भी केहू अब तक भोजपुरी में कइले बा ? भोजपुरी विषय पढ़ावेवाला शिक्षक के मांग कके आज तक संगठित रूप में भोजपुरियन का तरफ से कौनो आंदोलन उठल बा ? अगर ई समूचा सवाल के जवाब अब तक हमनी का लगे नकारात्मक बा त एकर दोष केकर ? अधिकार के सदुपयोग केहू ना करी त ओकरा खातिर दोषी के होई ? निश्चित रूप से अधिकार का साथे कर्तव्य भी रहेला । एकरा साथे इहो बात बुझेके पड़ी कि कर्तव्य पर ही अधिकार टिकल रहेला । कर्तव्य के अभाव में अधिकार के कौनो अर्थ नइखे । बाकिर जहाँ अधिकार नइखे ओतहाँ कर्तव्य कइला पर दंडित भी होखेके पड़ी । दूर जाएके अवस्था नइखे । २०२९ साल में रानी के जन्मोत्सव पर भोजपुरी में स्मारिका निकललें पंडित दीपनारायण मिश्रजी । एकरा खातिर उनका के तत्कालीन अंचलाधीश गारी-फजिहत त देबे कइलन, दिनभर अपना कार्यकक्ष में बंदी बनाके भी रखले रहस । उनकर कहनाम रहे— ‘राजारानी के गुणगान त ठीक रहे बाकिर भोजपुरी में काहे ?’ का आज कौनो सरकारी अधिकारियन के नेपाल में अइसन करेके मजाल बा ? निश्चित रूप से केहू ना कर सकेला । एकरा साथे साथ नेपाल के हर जनगणना में भोजपुरी भाषा के उल्लेख बा । नेपाल के केंद्रीय तथ्यांक विभाग में भोजपुरी भाषा के मातृभाषा भा संपर्कभाषा के रूप में बोलेवाला का बारे में केहू जाके आधिकारिक जानकारी माङ सकता । एह से कि अब ई एतहाँ के संवैधानिक भाषा बन चुकल बा ।
 ठीक एकरा विपरीत भारत के भले ई दोसरका भाषा काहे ना होखे, आज तक ओतहाँ के कौनो जनगणना में एकर उल्लेख नइखे । ओही तरे ओतहाँ के कौनो कार्यालय में भोजपुरी में निवेदन नइखे देहल जा सकत । भोजपुरी में साटा तक भी केहू नइखे लिखवा सकत । अगर लिखवइबो करी त ऊ मान्य ना होई । एकरा साथे साथ भारत के कागजी मुद्रा पर ओतहाँ के समूचे संवैधानिक भाषा में ओकर मूल्य यानी ऊ पाँच, दस, बीस, सौ केतना के नोट बा लिखल रहेला । का संवैधानिक मान्यता बिना मिलले भोजपुरी के ऊ सौभाग्य मिल सकता ? 

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ओही से बेहवार में उतारल भा उतरवावल ओतना कठिन नइखे जेतना कौनो विषय के संवैधानिक अधिकार में सामिल करावल । एह मामला में भले भोजपुरी नेपाल में बेहवार में उपेक्षित बा, बाकिर संवैधानिक आ कानूनी हिसाब से अब त विश्व में नेपाल ही बा जहाँ के ई संवैधानिक भाषा बा । त अपना अगर चले के ढङ नइखे त कम से कम दोसरा के चलाई पर टिका-टिप्पणी ना कइल बेहतर रही । हमनी के समाज में एगो बहुत प्रचलित कहावत बाः केकरा पर करीं सिङार पिआ मोरा आन्हर ? त हमनी अपना करते अन्हरकूप में बइठल बानी । एह से जरूरत बा जहाँ संवैधानिक मान्यता मिलल ओतहाँ ओकरा के बेहवार में उतरवावेके आ जहाँ नइखे मिलल ओतहाँ एकरा खातिर संघर्ष करेके आ चल रहल संघर्ष के कम से कम नैतिक समर्थनो करेके । एही से भारतीय भोजपुरियन के आपन मातृभाषा के ओतहाँ के संविधान के आठवाँ अनुसूची में सामिल करावे के संघर्ष में नेपालीय भोजपुरियन का ओर से हम पूरा-पूरा नैतिक समर्थन देतानी आ आउर भोजपुरियन से भी समर्थन देवेके हार्दिक आग्रह करतानी ।
वाणस्थली, महादेवस्थान-७, काठमाड़ो ।
भोजपुरी टाइम्स दैनिक, सावन १०, २०७२ में प्रकाशित ।

भोजपुरी भाषा हमार माई ह, लजाई काहे ?


भोजपुरी भाषा हमार माई ह, लजाई काहे ?

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निरंजन कुमार मिश्र
निरंजन कुमार मिश्र

जईसन कि  आदत बा, मेट्रो मे  चढ़ते हम गेटके लगे कोना मे खड़ा हो गईनी | अबही कुछ देर ही भईल रहे खड़ा भईले कि बहुत धिरे से एगो आवाज कान मे पड़ल,‘नायका दवईया से बाबूजी के आराम बा नु ?’ मुड़ के देखनी त हमरा ठीक पीछे बईठल एगो भाई कान से फोन सटा के एकदम धिरे-धिरे शायद अपना गांवे बतिआवत रहलन | बातचीत के टोन अउरी उनकर सूट-बूट आ टाई वाला पोशाक बतावत रहे कि भाई कवनो बढिया कम्पनी मे कवनो बढिया पोस्ट पर काम करे लन | बातचित के जेतना अंश हम सुन पवनी ओसे त इहे लागल कि उ अपना बाबूजी के तबियत के बारे मे बात करत रहलन बाकी आवाज के धिमापन ई साबित करि रहे किउ ना चाहत रहलन कि लोग उनका भोजपुररया पहचान के जानो | हमरा ई बात तनी खराब लागल काहे कि अब जबकि बहुत लोग आगे बढ़ के भोजपुरी के एकर असली सम्मान दिलावे के लड़ाई लड़ रहल बा ए समय अगर अइसन बुद्धिजीवी भोजपुरिया लोग ही अपना मातृभाषा के साथ उपेक्षा के भाव राखी त फेर दिल्ली जईसन शहर मे लोग भोजपुरिया लोगन के ‘अजीब नजर’ से ही देखत रही | हम सोचनी ई मुद्दा परओ भाई से कुछ बात करी | लेकिन फेर सोचनी कि कहीं उनका खराब ना लाग जाए | एही से एगो दोसर रास्ता अपनवनी उनका के देखावे ला कि भोजपुरिया माई के बेटन मे अइसन लोग भी बा जे अपना ब्यक्तित्व विकास के साथे-साथे अपना मातृभाषा के विरासत से भी जुड़ल बा | ओही बेरा हम अपना अघरे फोन लगा देहनी आ एतना आवाज मे कि वो भाई के सुनात रहो बतिआवे लगानी | आस-पास के लोग भीसुनत रहे, ताकत रहे बाकी लोग का कही एकरा कारण अपना मातृभाषा के साथे अन्याय नईखे नु कईल जासकत | हमरा फोन पर भोजपुरी मे बात करे के क्रम मे उ भाई बहुत बेर हमरा तरफ देखलन | उ जब देखस हम तनी हंसमुख चेहरा बना ली | ई सब मे ही हमार गन्तब्य ‘जीटीबी नगर मेट्रो स्टेशन आ गईल |हम फेर बिना उनका तरफ देखले उतर गईनी मेट्रो से | मेट्रो स्टेशन से निकले ला जब हम मशीन पर कार्डसटावत रहनी तले हमरा पीछे से एगो आवाज आईल,‘तनी जल्दी करअ भाई’ पीछे मुड़ के देखनी त उहे भाई रहलन | हमरा चेहरा पर त आश्चर्य के लकीर खिंच गईल | जब उ भाई कार्ड सटा के निकललन त हमही पूछनी कि ‘भैया अपने के घर कहाँ पड़ी’, ‘सिवान’ उ बतवलन | बिना देर कईले हम  अपना मुद्दा पर आ गईनी, ‘रउरा एही से नु धीरे -धीरे भोजपुरी मे बतिआवत रनी ह ताकि लोग ना सुने ?’ उ कहलन, ‘ए भाई जब तू पहिलके वाक्य बोलल ह फोन पर, गोड़ लाग तानी दीदी, त देखलअ ह केतना लोग के अचानक से मुड़ी उठ गईल ह, लोग अब भी भोजपुरी के हेय दृष्टि से देखे ला |’उनकर ई जवाब सुनके हम कहनी,‘अईसन भी हो सकता कि उ मुड़ी उठावे वाला लोगन मे  बहुत लोग भोजपुरी बोले वाला होखे आ ओमे से बहुत लोग के आज हिम्मत मिल गईल होखे कि उ लोग भी मेट्रो मे भोजपुरी मे  बतिया सकेला | अबही एतने बात भईल रहे कि उनकर फोन बाजल आ उ ‘ठीक बा बाय, अच्छा लागल तोहार भोजपुरी भक्ति’ कह के चल देहलन | हम सोचनी, ‘भोजपुरी भाषा हमार माई ह, लजाई काहे ?

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डिस्क्लेमर- यी पोस्ट आखर पत्रिका के जुलाई अंकसे लिहल बा.
disclaimer- this post is taken from aakhar.com . you can find this post in july publication http://aakhar.com/images/July15.pdf

ब्राहामणबादी अवुरी अवसरबादी के सिकार सोझ जानता !


ब्राहामणबादी अवुरी अवसरबादी के सिकार सोझ जानता !

 

अशोक कुशवाहा
अशोक कुशवाहा

नेपाल के जनम से पहिले गोरखा राज्य के शाहबंशी राजा के आपन राज्य बढ़ावे खतिरा उकसावे के काम गोरखा राज्यnepal-prithvinarayan के ब्राहामण लोग ही सूरु कईलख | नेपाल देश एकीकरण के लाड़ाई खतिरा सुरबीर मानल गईल क्षेत्री, राई, लिम्बू, गुरुंग, तामांग जईसन सूरबीर योद्धा लोग के मृत्यु के मुह में झोक के एगो छोट राज्य गोरखा के बडहन कर के नेपाल राज्य के संरचना कईल गईल | आज के ब्राहमण पुस्ता भले ही शाहबंस के योगदान भुला गईल होखे बाकिर यी लोग के पुस्ता के जिनगी शाहबंस के चमचई करे में गुजरल एकर इतिहास कईसनको जन युद्ध से नईखे बदलल जा सकत | भले ही आज कोई गणतन्त्र, सामजबाद चाहे कम्युनिज्म के नारा काहे ना लागावत होखे लोग |

नेपाल में राजनीति के सकुनी रणनिती के जनम दाता ब्राहमण लोग के ही मानल जाला | इतिहास से ले के बर्तमान तक राजनीति में ब्राहमण लोग के ही बर्चस्व रहल बा एकरा के नईखे नाकारल जा सकत | ब्राहमण जाती के इतिहास युगों युग से चलत आइल बा जे लोग सीधा साधा जानता के शुरुवे से ही मुरख बानावते आगईल लोग | हमनी के जनमानस में फैलावल ब्राहामणबादी के बेमारी ब्राहामण लोग के आपन पेट पोसे अवुरी घर चलावे खतिरा ब्राहमण जाती से ही फैलावल गईल | जवन आज हमनी के रीतिरिवाज अवुरी परम्परा बन के रह गईल बा | श्रावण, भादो के महिना में सभे जन मानस के घरपरिवार से ले के ब्यापार तक भादरा लागल रहेला बाकिर यी महिना में ब्राहमण लोग के पूजा के ब्यापार खूब चले ला |

मधेशी, दलित चाहे जनजाती यी लोग जरुरत से ज्यादा सीधा साधा होखेले | भोजपुरी में एगो कहावत बा की “मुरख लगे पईसा रही त चलाख कहियो भूखे ना मरे” देश के राजनीति ब्राहमण लोग से भरल रहे, बा अवुरी रही यी सभे जनमानस के पता ही बा | ब्राहमण लोग यी भोजपुरी कहावत बहुत बढ़िया से समझेले | देश के शाहबंशी राजा लोग के कुबेर के उचित प्रयोग करे के होखे चाहे देश के सीधा साधा मधेशी, जनजाति चाहे दलित के सोझापन के फायदा उठा के देश में राज करे में माहिर ब्राहमणबादी अवुरी अवसारबादी निति के ज्ञान यी लोग के जन्मे से दैबिक प्राप्ती भईल रहेला | उ लोग के सिकार मधेशी, दलित अवुरी जनजाति शुरुवे से रहल बा अवुरी अभी भी प्रमुख सिकार मधेशी, दलित अवुरी जनजाति ही बनल बा | देश के दुर्दशा ब्राह्मणबादी अवुरी अवसरबादी सोच के ही परिणाम ह |

१२ बरस के जनयुद्ध भी ब्राहमणबाद से ही शुरू भईल जहा सीधा साधा अशिक्षित दलित, मधेसी अवुरी जनजाति लोग के जातीय राज्य, धार्मिक बर्गीकरण, भाषिक पहिचान अवुरी जातीय पहिचान के लड्डू देखा के शिक्षित, धूर्त,  ब्राहमणबादी अवुरी अवसरबादी नेता लोग नेतृत्व संभललख लोग जवन जनयुद्ध में १५००० हाजार से बहुती मानव क्षति भईल अवुरी जब देश के नेतृत्व संभाले के मौका मिलल तब यी सत्ता पिपासु लोग अवसरबादी बन के सोझा साझा जानता के धोका देके आपन आपन कुर्सी खून पिएवाला जोख के जईसन पकड़ लेहलख लोग | इतिहास में भी इहे ब्राहमणबादी अवुरी अवसरबादी देश के बिगड़ले रहे लोग अवुरी आज भी ईहे यी देश के बर्बादी के कागार पर ले के जा रहल बा लोग |

कम्युनिज्म के लाल किताब पढके रास्ट्रीयता अवुरी समाजबाद के ज्ञान बाटे वाला अवुरी रात भर में देश के कायापलट कर के नेपाल के सिंगापूर बनावे के सापना देखावे वाला माओबादी लोग | देश के बर्बाद कर के देश के युवा शक्ति के काया पलट के रख देहलख लोग जेकर परिणाम ह की आज खाड़ी मुलुक के हर देश में युवा शक्ति गिरमिटिया मजदुर बन के शोषण के सिकार हो रहल बा लोग | जे जे उच्च ओहदा पर रहले उ सात पुस्ता ला धन सम्पति जुटा के रख लेहले अवुरी आपन बाल बच्चा के बिदेश में पढ़ा रहल बाड़े  अवुरी शानो शौकत से आराम के राजवाड़ी जिनगी बिता रहल बा लोग |

धन को लोभी अईसन नेता लोग बिदेशी शक्ति के भर पर आपन डेग राजनीति में आगे बढ़ावे ला लोग | बिदेशी भीख के ऊपर देश के बिकास करे में बिश्वास रखेवाला अईसन राजनीतिज्ञय लोग आज देश के बजेट रेमिटेंस अवुरी बिदेशी आर्थिक सहयोग के आधार पर बानावे लोग | नेपाल में आइल प्राकृतिक बिपत माहा बिनास्कारी भूकम्प में मानवीयता क्षति भईल यी बिपत से सिर्फ अवुरी सिर्फ साधारण जानता के असर परल अवुरी अइसन माहा बिपत में भी अवसरबादी आपन स्वार्थी अवसर ना छोड़लख लोग | कोई त्रिपाल बेचलख त कोई करकट बेचलख, कोई चाउर दाल चोरईलख त कोई आर्थिक सहयोग पर चिलहोर के जईसन नजर रखलख | अईसन अवसरबादी लोग से देश के दलित, जनजाति चाहे मधेसी लोग का आश कर सकता |

नेपाल में राजधानी काठमांडू के केन्द्रीकरण भी यी ब्राह्मणबादी अवुरी अवसरबादी लोग के कमीनापन के उदाहरण ही ह | नेपाल के कौनो भी जगह रऊवा पढ़ाई करी बाकिर प्रमाणपत्र खतिरा रउवा काठमांडू ही जाए के पड़ी | नेपाल के हर सारकारी, अर्ध सरकारी चाहे गैर सरकारी संस्था ही काहे ना होखे सारा के केन्द्रीकरण काठमांडू ही कईल रहेला | अईसन राजनीतिज्ञय लोग एक बेर केन्द्र में पहुचते उ लोग के काठमांडू में घर किना जाला ओकरा बाद गाव के रस्ते भुला जाला लोग | अगर रौउवा कौनो किसिम के सेवा चाही त जाई काठमांडू | नेपाल के राजनीति के सब से घिन लागेवाला काम स्थानीय राजनीति जाहा हर १० आदमी के बिच में ८ आदमी कौनो ना कौनो राजनीतिक पार्टी से ही जुडल रहेला लोग |

देश के कौनो अईसन अंग नईखे जवन यी लोग के अशिर्बाद बिना के चलत होखे | निजी ब्यापार, गैरसरकारी संघ संस्था, प्रशासन, संचार चाहे सुरक्षा निकाय सब के सब राजनीति से प्रभावित बा | काठ के दीमक नियन यी देश के हर अंग के खोखला बाना के रख देहेले बा लोग |  ५७ बरिस पहिले ईहे मधेश से राजधानी काठमांडू जाए ला अनिवार्य रूप से परिचय पत्र खोजल जात रहे ओह बेरा मधेस पूर्ण रूप से अपने आप पर निर्भर ही ना रहे बाकिर भारत जईसन बड़का पडोसी देश में बहुते कुछ के निर्यात करे के भी सक्षम रहे | आज मधेस के नेपाली उपनिबेश बनावला के पिछे स्वार्थी अवसरबादी लोग के ही हात रहे | नेपाल के उपनिबेश भईला से मधेस के फायदा त कुछो ना भईल बाकिर घाटा सदैव होते आगईल |

अवसरबादी नेता लोग अगर बोलता की मधेस मतलब बिहार होखेला त उ देश द्रोह ना होखेला बाकिर अगर एगो मधेसी अगर आवाज उठा देवेला की मधेस अलग प्रदेश होखे के पडल त उ देश द्रोही कहला | यी ह हमनी रहेवाला नेपाल देश के राजनीति | दोसरा देश के अंग दार्जिलिंग के जानता नेपाली ह बाकिर आपन देश के मधेसी बिहारी ह | भारत में भारतीय सेना से आवाकास प्राप्त नेपाली लगे भारतीय अवुरी नेपाली दुनु नागरिकता बा त कौनो बात नईखे बाकिर मधेसी के आपन बंसज नागरिकता खतिरा भी पूछताछ जरुरी बा | जेकर जनम से लेके पालन पोसन दोसर देश में होखे बस ओकरा नाम के पीछे आर्याल, पन्त, पौडेल, भटराई, दाहाल चाहे कोईराला उपनाम लागल बा भले उ नेपाली बोले के जनत होखे चाहे ना पर उ नेपाली काहला बाकिर मधेसी नेपाल में जनमल नेपाल में बाड़का भईल नेपाल के हर काम काज में हिस्सेदार रहल अवुरी शुद्ध नेपाली भी बोले त का ह बाकिर उ बिहारी काहाला |

देश के जानता अईसन राजनीतिज्ञ लोग के केतना प्रेम करेला की सामाजिक संजाल फेसबुक चाहे ट्विटर पर नेपाली राजनीतिज्ञ लोग के अगर राउवा खाता खोल के देखि त ऊपर से निचे तक सिर्फ अवुरी सिर्फ अश्लील गारी से ही भरल मिलेला | केकर केकर धरी नाव कमरी ओढले सागरी गाव भोजपुरी काहावत के नेपाली राजनीतिज्ञ लोग प्रैक्टिकली प्रमाणित कर देहेले बा लोग | जेकरा जेतने मिलता ओतने लूट के खुश रहता लोग पर लुटत जरुर बा लोग | मधेस के बीड़ा उठा के केन्द्र में पहुचल कुछ मधेसी अवसरबादी लोग भी बा जे आपन स्वार्थ पूरा करे खतिरा ब्राहमणबादी के छाला ओढले बा लोग | अईसन बात नईखे के मधेसी जानता सचेत नईखे बाकिर जानता सब जानत बा लोग की सियारा उहे ह पोछ्वा रंगवले बा |

सिनेमा बिना कवन अकाज हो जाई ?


सिनेमा बिना कवन अकाज हो जाई ? 

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नितिन चन्द्र
नितिन चन्द्र

एह सवाल के पुछे से पहिले इ पुछे के चाही कि का कहानी, लिखल, सुनावल जरूरी बा ?बा त केकरा खातिर ? लिखेवाला खातिर के पढे भ सुनेवाला खातिर ? हजारन साल पहिले राम, सीता, रावण आ लछमन के कहानी बतावल गईल । का जरूरी रहे बतावल ? अर्जुन, कृष्ण के का कहलन कुरुछेत्र मे ? काहे जरूरी रहे बतावल गीता के रुपमे ? ईसा मसीह के होली ग्रेल के घटना का रहे ? बुद्ध कवन उ आठ बात कहले रहलन बेहतर जीवन खाती ? भिखारी ठाकुर काहे नाटक करत रहलन जेकरा मे पुरुष देस के कहानी आईल आ दोसरा ओरि भोजपुरिया छेत्र के गावन के ओह समय का हालत रहे, इहो पता चलल । कई बार इतिहास किवदंती के रूप ले लेवेला । आ किवदंती इसिहास हो जाले । ई बहस पुरान बा कि रामायण कहानी बा कि सांचो उ कुल भईल रहे । लेकिन हमार सवाल ई बा कि रामायण लिखे के का जरुरि रहे ?

अब आ जाईं सिनेमा के बात पर । देखल जाव कि हमनी के देस के पहिला फिलिम भी साहित्य पर आधारित बा । राजा हररिंद्र – 1911 मे बनल । रामायण भी 1987 मे टी वी खातिर बनल । महाभारत भी टी वी पर आ गईल । हमार एक ठो जान पहचान के लईका बा पटना के । एक दिन कहता कि बी० आर० चोपड़ा नु लिखें थे महाभारत  ? त हम कहनी कि फिर त रामायण रामानंद सागर लिखे होंगे । त कहता, हाँ । बाप रे हँसत – हँसत पेट बथा गईल रहे ओ दिनवा । अब दोसर सवाल बा कि  जब पन्ना पर लिखाईल रहे त टी वी सीरियल आ सिनेमा बनावे के का जरुरि बा ? इयाद होखी कि दीपिका आ अरुण गोविल के लोग पूजा करत रहे । ई ह ऑडीओ – विज़ुअल (audio – visual) के असर ।

हॉलीवुड मे पिछला कुछ साल मे एडाप्टेशन, मने किताब से फिल्म बानवे के चलन बढ़ल बा । पहिले त होत रहे कि किताब छपला के कई महिना दिन साल बाद फिलिम बनत रहे । अब त अइसन हो गइल बा कि किताब छापे से पहिले वोकर सिनेमा बानवेके अधिकार बिक जाला । देखी हैरी  पॉटर आ हंगर गेम्स दुन्नु सीरीज के इहे भईल । अईसन बहुत बाड़ी सन । अभी “अमेरिकन स्नाइपर” आईल रहे हमार पसंदीदा निर्देशक क्लिंट ईस्टवूड के । पिछला साल उपन्यास लिखाईल रहे, लेकिन एह साल वोपर फिल्म बन गईल । रउवा लोग सुनले होखब कि चेतन भगत के किताब “हाफ गर्लफ्रेंड” के फिल्म बनावे के राइट किताब आवे के पहिले एकता कपूर खरीद लेले रहली । तनि सोची कि अगर हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री बंद हो जाए त हिन्दी भाषा पर का असर पड़ी ? आज अगर लोग, आ खासकर सहरुवा लोग हिन्दी से जुडल बा त ओकरा पीछे सिनेमा के छोड़ीके कवनो दोसर अतना मजबूत माध्यम नईखे । आ धीरे धीरे छोट शहर जैसे पटना, इलाहाबाद, बोकारो, रांची मे भी ई चीज़ धीरे -धीरे ढुक गइल बा ।

हम  एक कोरोलरी भा थेओरी देबे के चाहब । हम चाहब कि केहू एकरा के गलत सिद्ध करे ताकि  हमनी  इ फेनोमेना के अवरी समझीं । “भाषा के भविष्य, सिनेमा  के हाथ मे सुरक्षित बा । भाषा उहे बाची जेकर सिनेमा होखी  आ जेकर साहित्य बररयार रही । सिनेमा ओकर बढ़िया होखी जवन समाज  आपन भाषा से दूर नइखे गईल । नया युग के साहित्य सिनेमा हटे  ।”

फोटो साभार- नबीन कुमार के फेस्बूक टाटी से
फोटो साभार- नबीन कुमार के फेस्बूक टाटी से

अब इ थियरी भोजपुरी सिनेमा पर लगाईं । साहित्य बा लेकिन समाज भाषा बोलत नईखे । त सिनेमा उजड़ गईल । Mass Communication के पढ़ाई मे एक चीज़ कहल जाला । “Media shapes society and society shapes Media”. मने ई कहल जा सकेला कि “सिनेमा समाज के आकार दिही आ समाज सिनेमा के” । सिनेमा एहीसे जरुरी बा  कि जवन जुग मे हमनी के बानी जा, इहां से उ जुग के सुरुआत भईल बा; जहां लोग “गांधी” आ “हिटलर” के ना पढ़ी ना देखी । जहां लोग भिखारी ठाकुर के जीवन पर लिखल “सूत्रधार” ना पढ़ी ना ओकरा ऊपर बनल सिनेमा देखी । छपरा के बहुत युवा के मालूम  भी नईखे कि भिखारी ठाकुर के रहलन, , लेकिन  एगो फिल्म छपरा के पंकज सिनेमा मे लग जाए त सब लोग जान जाई । पढ़े वाला लोग के संख्या दिन पर दिन घट रहल बा । साहित्य से सिनेमा आ सिनेमा से साहित्य निकलता लेकिन अब ई बात मान लिहीं कि नया साहित्य “सिनेमा” ह । रउवा ध्यान से देखीं, जवन लोग के साहित्य मजबूत रहे, उ लोग के सिनेमा भि मजबूत बा । मजबूत सिनेमा वाला सब राज्य कवनो ना कवनो तरीका से बिकसित बा । खासतौर पर जहां पर शुरु से भाषा आ साहित्य रहे । लेकिन उ राज्य जहां साहित्य रहे आ सिनेमा कमजोर पड़ गईल, उ राज्य आ समाज के विकास ना भईल । सीधा  बात बा कि  हम  बात  भोजपुरी के कर रहल बानी । भोजपुरी मे जईसन सिनेमा बनी ओकर पहचान वइसने होखी । बतावे के जरुरि नईखे कि का हालत बा । एक साल पहिले तक हम इहे सोचत रहनी कि युवा के भोजपुरी मे बात करे के चाहीं । माँ पिता के भोजपुरी मे बात करे के चाहीं । लेकिन काहे ? हमनी किहाँ सबसे पहिला सवाल इहे पुछल जाला कि बड़ होके का बनबs ? आ साँच बात बा कि  हमनी के कुछुओ बनी जा, चाहे हमनी के बच्चा बनिहन सन, ओकरा मे भोजपुरी के लेके कुछो बने के उमेद नईखे । त जनरल माता पिता इहे सोचेला कि बच्चा के भविस का होई । इहे हाल हम मैथली के देख के आ रहल बानी । लेकिन देस के कई राज्यन के सरकार ई बात समझ गईल बिया कि सिनेमा खाली कला आ मनोरंजन के साधने नईखे बल्कि बिजनेस के साथे संस्कृति आ राज्य के पहचान के माध्यम  भी बा ।

अगर बिहार सरकार के बात कईल जाव त उ लोग के तैयारी सुन्ना बटा सन्नाटा जोड़ कटहर बा । हम कई हाली बिहार सरकार के लोग से मिलल बानी 2011 से लेके आज तक । कई मंत्री अइलन गइलन लो, बाकिर सिनेमा ओहिजा के ओहिजे बा । हम बिहार सरकार के नीति देखनी हs । “बिहार राज्य फिल्म  प्रोत्साहन” नीति । लेकिन सच पूछीं त प्रोत्साहन नीति नईखे ई हतोत्साहन नीति बा । एकरा मे अभी भी ई लोग फिल्म नेगेटिव के बात करता | ई लोग के पता होखे के चाहीं कि देश के सब लैब अब बंद हो चुकल बा । बस एक ठो खुलल बा । नेगेटिव सप्लाई खासिर फुजी आ कोडेक आपन ऑफिस बंद क देले बिया । लेकिन अभी उ लोग एकरे पर चलता । सबसे बड़ बात कि ई लोग फ़िल्मकार के 10-12 प्रतिशत ब्याज पर पैसा दिही । उहो कुछो बनकी रख के । जेकर माथा खराब होखी उहे नु बिहार सरकार के गाईडलाईन मे फिल्म बनाई । उहो पइसा ब्याज पर लेके । माछियो के मुड़ी जतना अकिल रहित त कम से कम दोसरा राज्यन के नीति देख लेबे के चाहत रहे ई लोग के । उत्तर प्रदेश सीधा सीधा कहता कि हम 2 करोड़ देब 90 प्रसिशि शूटिंग होखी त । भोजपुरी बुंदेली अवधि के अतना देब आ बाकी लोग के वोतना । महाराष्ट्र सरकार मे मराठी बनावे वाला के 50 लाख रुपिया देबे के प्राबधान बा । कनााटक मे भी । हर राज्य मे सरकार स्थानीय सिनेमा खातिर बहुत कुछ करतिया , लेकिन हमनी किहा नेता सब के मालुमे नईखे कि करे के का बा ?

अगर 2025 के आगे भाषा के ले जाए के बा त इ काम खाली सिनेमा कर सकेला, काहे कि इहे नवका जुग के साहित्य बा । उपन्यास आ दोसर साहित्य पढ़े के ना त रूचि बाँचल बा ना समय । आ ई मय भाषा मे भईल बा । भोजपुरी के तनी मामीला इहो गड़बड़ बा कि लोग बोलबो कम करेला । एहिसे अवरी बरबादी भईल बा । आज हमनी के कतनो भोजपुरी के कागज़ पर लिखीं लेकिन उ सेलुलॉइड पर ना गईल त इ खाली कुछ लोग के शौक़ आ प्रेम बनके रह जाई । भोजपुरी के 100 साल दबावल गईल, तेपर भी हमनी के किताबी साहित्यसे शुरुवात नईखीं कर सकत । रोड पर बैलगाड़ी ना मोटर कार चाहीं । बढिया सिनेमा आई त भाषा के भी बल मिली ।

त आखीर मे  हम  इहे कहब कि  भोजपुरी से प्रेम करेवाला लोग के अच्छा सिनेमा खातिर सामने आवही के पड़ी । काहेकि दोसर कवनो रास्ता नईखे । चाहे कतनो उपन्यास लिखाए, सिनेमा ना होखी त चीज़ ना बदली । सिनेमा ना होखी त भाषा खत्म हो जाई । एकरा से बड़ अकाज का हो सकेला  ?

“We will have to repent in this generation not merely for the vitriolic words and actions of the bad people, but for the appalling silence of the good people. ” – MARTIN LUTHER KING.

नितिन चन्द्र
नितिन चन्द्र

डुिमरांव , बिहार के रहे वाला युवा निर्देशक, भोजपुरी सिनेमा में सकारात्मक चर्चा के सुरुवात करे वाला देसवा फिल्म के निर्देशक नितिन चन्द्र जी, भोजपुरी भाषा आ साहित्य खाती कलम से ही ना कैमरा से भी आपन शत प्रतिशत दे रहल बानी । एह घरी ईहा के मुंबई में बानी ।

नोटिस – यी पोस्ट आखर पत्रिका के जून अंक से लिहल गईल बा रौवा यी पोस्ट aakhar.com से डाउनलोड कर सकत बानी । यी पोस्ट कवानों तरीका से कॉपीराइट के उलंघन नईखे करत आ ना ही कवानों दावा करत बा ।

भोजपुरी जागरण ६ – नेपाल के भोजपुरी अउरी अश्लीलता !


भोजपुरी जागरण ६ – नेपाल के भोजपुरी अउरी अश्लीलता !


“दोहा के रंग जम गईल भाषा भोजपुरी के संग
अश्लीलता के साथ लडल जाव भोजपुरी के जंग”

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अशोक कुशवाहा
अशोक कुशवाहा

नेपाल में भोजपुरी भाषा नेपाल देश के जनम के पहिले से चलल आईल बहुते पूरान भाषा ह | भोजपुरी भाषा एगो बहुते समृद्ध भाषा ह एही के करते आज यी भाषा बिश्व स्तर पर बहुते सुनदरता के साथ करोडो जनमानस के बिच बोलल जाला | नेपाल के पुरबी जिल्ला सर्लाही से लेके पश्चिम रुपन्देही तक भोजपुरी भाषा बोलल जाला | भोजपुरी भाषा के जनभाषा के रूप में बिश्व स्तर पर सर्बाधिक प्रतिष्ठित ओहदा मिलल बा | यी बात त सारा दुनिया के बखूबी मालूम बा की भोजपुरिया भाषी दुनिया के कौनो भी कोना में गईल बा उहा आपन भोजपुरी भाषा के मान औरी सम्मान के साथे परचम लहरईले बा | एकर उदाहरन स्वरुप रौउवा भारत में अंग्रेजन के राज में बिहार से गिरमिटिया लोग के बिदेश में पलायन औरी बिदेश में भोजपुरी संस्कृति के बिकास के फैलावल गईल भाषिक चादर के ले सकिले | यी भोजपुरी भाषी लोग के आपन भाषा प्रति के प्यार ह जे आज दुनिया भर में भोजपुरी के डंका बाज रहल बा |

हमनी के देश में भोजपुरी बोलेवाला लोग के क्षेत्र एतना लमहर होते हुवे भी भोजपुरी भाषा के आपन घरही में इज्जत औरी सम्मान नईखे मिलत | जेकरा आपन घर में आदर सम्मान नईखे मिलत ऊ बाहरा के लोग से का आश रख सकता | रउवा अगर दोसर भाषी के आदमी लगे भोजपुरी के नाम रखी त लोग घृणित नजर से देखेला जईसे के राउवा कौनो गुनाह कर देहेले बानी काहे की सभे कोई के मन में अश्लीलता भोजपुरी के पहिचान बन के बईठ गईल बा |

हमनी के यूवा पीढ़ी के ज्यादा दोष देहेंम जे अश्लीलता के बढावा देहले बा लोग औरी भोजपुरी जईसन मिठ भाषा के अश्लीलता में सांगितिक रूप देके बदनाम कर रहल बा लोग | आज काल के शादी बियाह में सात सहेलिया चाहे आर्केस्ट्रा में युवा पीढ़ी के अश्लीलता पर झुमत देख के शिर शरम से झुक जाला | यी आधुनिक दुनिया में अश्लीलता के करते भोजपुरी संस्कृति काल के गाल में धीरे धीरे समाईल जाता औरी मन में डर भी रहता की आधुनिकता औरी अश्लीलता के एह आन्ही में भोजपुरी के पहिचान अश्लीलता ही बन के ना रह जाए |

अब ऊ समय आ गईल बा की नाय युवा पीढ़ी में भोजपुरी के मिठास औरी भोजपुरी भाषा सम्बन्धी उच्च कोटि के ज्ञान के अभियान चलावल जाव | ईनार के बेंग नियन क्षणिक ख़ुशी खतिरा अश्लीलता में भुलाईल भटकल लोग के दुनिया के हर भाषा से शाब्दिक औरी साहित्यिक धनिक भाषा भोजपुरी के ज्ञान बाटल जाव | शब्द औरी साहित्य के धनिक भोजपुरी भाषा के ज्ञान जब जक जन जन में ना फैली तब तक लोग के आँख पर परल अश्लीलता के करिया पर्दा ना हटी |

भोजपुरी अध्यन तथा अनुसन्धान केन्द्र द्वारा हमनी भोजपुरी भाषा के राजधानी मानल गईल नेपाल के पर्सा जिल्ला के बीरगंज नगरी से आपन अभियान शुरू कईनी औरी एह अभियान से बहुते बढ़िया प्रतिफल प्राप्ति भईल जवन हमनी के सोच से भी बहुति रहल | हमनी के यी संस्था के प्रमुख उदेश्य अश्लीलता सम्बन्धी के अध्यन रहल | एह अध्यन में हमनी पर्सा जिल्ला के पोखरिया से लेके बारा जिल्ला के इतिहासिक जगह सिमरौनगढ़ तक सांगितिक अउरी बतकही कार्यक्रम जगह जगह पर कईल गईल औरी ईहा अश्लीलता के बात उठावल गईल | हर कार्यक्रम में १०० से लेके ४०० के संख्यामें आदमी लोग के सहभागिता रहल औरी हर जगह अश्लीलता के ऊपर एके गो बात सुने के मिलल की अश्लीलता भोजपुरी के पहिचान ना ह | सभे कोई अश्लीलता के बिरोध में ही रहल लोग | आज अगर हमनी अश्लीलता के बिरोध में एक जुट होंके बिहार राज्य से घुसपैठ कर रहल अश्लीलता के ना रोकल जाई तब बिहान यी अश्लीलता ही हमनी के भाषा भोजपुरी के पहिचान बन के रह जाई |

भोजपुरी जागरण ७ – “नेपाल के शिक्षा प्रणाली औरी भोजपुरी भाषा !”


भोजपुरी जागरण ७ – “नेपाल के शिक्षा प्रणाली औरी भोजपुरी भाषा !”

“भोजपुरी भाषी के आवाज भोजपुरी भाषा के बिकास”
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अशोक कुशवाहा
अशोक कुशवाहा
नेपाल संबिधान के मुताबिक नेपाल देश के हर नागरिक के आपना मातृभाषा में ज्ञान प्राप्त करे के अधिकार बा | भोजपुरी भाषी लोग अबही ले आपन भाषिक अधिकार से बन्चित बाटे लोग | अईसन बात नईखे की यी बिषय पर पहल नईखे भईल | भोजपुरी भाषा के बिद्यालय स्तर पर शिक्षा प्राप्ति खतिरा शिक्षा प्रणाली लागू भी भईल, भोजपुरी भाषा के किताब भी छपल औरी भोजपुरी क्षेत्र के शिक्षक लोग के भोजपुरी पढावे के ट्रेनिंग भी देहल गईल बाकिर आज तक ले भोजपुरी के कौनो भी क्षेत्र के बिद्यालय में एकर पढ़ाई ना भईल | भाषा अभिब्यक्ति के माध्यम होला औरी भोजपुरी भाषा के बिद्यालय स्तर पर लागु कईला के मूल उदेश्य छात्रन के भाषाई अभिब्यक्ति मजबूत बानावल ह |
 नेपाल के बिद्यालय स्तरीय भाषिक शिक्षा प्रणाली पूर्णरूप से नेपाल के पहाड़ी क्षेत्र के केन्द्रित कर के बनावल गईल बा | हमनी के बिद्यालय स्तर में नेपाली भाषा औरी नेपाली भाषिक लेखक के भी अभिब्यक्ति पढ़े के मिलल औरी उहे पाठ्यक्रम अभी भी चल रहल बा | जवन बिशेष रूप से नेपाली भाषा औरी पहाड़ी क्षेत्र पर ही आधारित रहे | रारा ताल काहा बा ? तिलिचो ताल काहा बा ? बलभद्र सिंह के रहे ? काठमांडू उपत्यका कईसे बनल ? जंग बहादुर के इतिहास का ह | यी कही भी पढ़े के ना मिलल की सिम्रौनगढ़ के इतिहास का ह? रामग्राम के इतिहास का ह? अलौ परब काहे भईल ? जनकपुर के औरी धनुषा धाम के इतिहास का ह ? भवानी भिक्षु (भवानी प्रसाद गुप्ता) काहा के रहलन? अईसन बात नईखे की खाली पाहाड के ही इतिहास बा मधेश के नईखे |
 भोजपुरी भाषा साहित्यिक औरी शाब्दिक रूप से जेतना धनिक बा ओतना दुनिया के दोसर भाषा ना लौउके ला | अईसन बात नईखे की भोजपुरी भाषा के साहित्यकार लोग के कमी रहे जे नेपाली साहित्यकार लोग के रचना ही बिद्यालय स्तर पर लागू कईल गईल | राऊव अगर उच्च या उच्चतर बरगन में भोजपुरी भाषी साहित्यकार भवानी भिक्षु के रचना पढ़ेम तब आपन भोजपुरी भाषा के ठेठ शब्द पढ़े के मिली जईसे की उनकर रचना में पात्र के नाम "घरहू महतो" चाहे "होरहा", "लुकाठी" जवना के नेपाली भाषा में बदल के राखल गईल बा | भवानी भिक्षु जी दोसर नेपाली भाषी साहित्यकार लोग जईसन प्रसिद्ध ना भईला के एके गो कारण रहे की उ भोजपुरी भाषी रहनी |
 मातृभाषा में बिद्यालय स्तरीय शिक्षा जेतना भोजपुरी भाषी लड़िकन लोग में भाषाईक मारक क्षमता के बिकास कर सकता ओतना दोसर भाषा असरदार नईखे हो सकत | दोसर भाषा में शिक्षा ग्रहण छोट छोट लईकन पर मानसिक दवाब भी बनावेला काहे की बिद्यालय स्तर के प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त करे वाला लईका लोग के मानसिक स्थिति ओतना बिकसित ना होखे जे उ दोसर भाषा के शब्द एतना सहज रूप से ग्रहण कर सके | मातृभाषा के ज्ञान जेतना लाइका सब में ज्ञान के अँजोर फैलादेवला ओतना दोसर भाषा सफल ना होखेला | जिनगी में सब भाषा के महत्व रहेला बाकिर मातृभाषा लड़िकन के बिकास में निर्णायक भूमिका निभावेला औरी मातृभाषा के उपेक्षा लईकन के जिनगी में मानसिक बाधा उत्पन्न करेला |

बियाह के चेतावनी !


बियाह के चेतावनी !

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अशोक कुशवाहा
अशोक कुशवाहा

हर धरम के हिसाब से मानव जाती के जिनगी में सब से महत्वपूर्ण काम ह बियाह कईल | बियाह कईला के बाद लईका लोग में आचानक निश्चित कालीन बदलाव देखे के मिले ला | यी बदलाव के उमर ज्यादा से ज्यादा १ बरिस होखेला काहे की एक बरिस के भीतरे घर में आईल नया दुलहिन घर के सारा उदिया गुदिया से परिचित हो जाली औरी आपना अवकात पर उतर जाली | कुवांर स्वतन्त्र जिनगी में धुमघाम बर्बादी के से लियावला के हमनी के सामजिक भाषा में बियाह कहेनिसन | यी बियाह करे में घर परिवार पूर्ण सहमती रहेला | बलि देवे से पहिले जईसे बकरी के फुल माला पहिरा के इज्जत के साथ ले जाईल जाला ओइसेही दूल्हा के भी फुल माला से सजा के बियाह में काटाए खतिरा भेजे के रीतिरिवाज चौतरफी बा | बियाह के साल भर के बाद के जिनगी अईसन खरकोचाह हो जाला की का कहल जाव | दाना पानी समय पर मिलो चाहे ना मिलो झागडा हर दम समय पर जरुर मिलेला सायद एही से ह की हमनी के समाज में ९५% मेहरारू से पाहिले मरद लोग बुढा के मर जाले | आई शुरू से हमनी के बियाह के बिषय में चर्चा कईल जाव |

बियाह के शुरुवात डोम से डाला औरी पण्डित जी के पूजा से शुरू होखे औरी उहे डोम से मरे के बेरा आगी कीने के पड़ेला औरी पण्डित जी से पिंडा परवावल जाला | घर परिवार के भी पता रहेला की बियाह कईल केतना खतरनाक ह जानते हुवे भी उ लोग बेटा के मौत के मुह में भेजे लोग | दूल्हा के टोपी में सुई गाथल जाला यी जानते हुवे भी की बबुवा जाहा बियाह करे जातारन उहा डाईन सन इनकार के कारन कर दिहे सन | लाल जूता पहिरावे के रश्म रहेला लाल रंग खतरा के निशानी ह फिर भी दूल्हा राजा आपन दुर्गति खतिरा सज धज के निकलेलन | हम लईकी के हिम्मतवाली शेरनी औरी लाइका के डरपोक शेर कहेनी काहे की एगो शेरनी के लियावे खतिरा सैकड़ो शेर लोग बारात के नाम पर झुण्ड बाना के लियावे खतिरा जाला लोग | एही से पता चलेला की लईका में केतना दम होखे औरी लईकी उनका जिनगी में आई त कईसन तूफान लेके आई |

५५५बारात में एगो नागिन स्वरूपा बाजा बजावल जाला जवना के गाव जवार में अलग अलग नाम से भी जानल जाला | कही एकरा के नरसिंघा, कही सिंघा, कही धुतुन्गा कहे लोग पर हम एकरा नामकरण नागिन बाजा ही कईले बानी औरी एकरा के अईसन तरीका से बजावल जाला की बजावे के समय में सभे कोई एकरा के देखबो करेला औरी सुनबो करेला | यी बाजा बिच बिच में बजावला के अर्थ लईका के सावधान कईल रहेला की आइसनके नागिन तोहरा जिनगी में आवत बाडी अभी भी भागे के समय बा भागजा | एकरा आलावा बारात में नागिन नाच भी चेतावनी खतिरा अनिवार्य नाचल जाला बाकिर आधुनिक बरियात में अब नागिन नाच लोप होखे के कागार पर बा | बबुवा के आँख लईकी के प्रेम के शेहरा नामक झपना से अईसन झापाईल रहेला की उ अन्हरीयायिल रहेलन की उनकर कुछो ना अवगते | दूल्हा के गदहा औरी घोडा पर भी बईठावे के चलन बा यी कईला के उदेश्य ही रहेला की लईका लगे अभिनो समय बा गदहा चाहे घोड़े के सावरी कर के निकल ल |

बाराती में नाचेवाला बरियतिया दू किसिम के होखेला लोग | एगो उ जेकर बियाह हो गईल रहेला औरी दोसर लईका के छोट भाई लोग | बियाहल लोग यी सोच के नाचेला की हम त कटईबे कईनी केतना एतना साम्झावाला पर ना मनल ह त अब तुहो काटा | लईका के छोट भाई इसे नाचे लोग की भईया की बियाह हो गईल एकरा बाद त हमरे नु नम्बर बा | जब बारात दुवारा पर पहुचेला तब पण्डित जी दुवारपूजा के बाहने संस्कृत में बबुवा के सम्झावेलन की अभियो समय बा बबुवा भाग जा पर आज काल के लईका लोग के संस्कृत के कहा ज्ञान रहता की सम्झेलोग | जूता चोराई के रश्म के द्वारा साली लोग भी अपने होखेवाला जीजा के चेतावेला लोग की जीजा जी नंगे पैर भाग जाई अभी भी समय बा काहे की साली के बखूबी मालूम रहेला की उनकर दीदी केतना खतरनाक हाई औरी सीधा साधा होखेवाला जीजा के का हाल करिहन |

गहना गुरेथे के समय में ससुराल के सभे मेहरारू लोग मिल के दूल्हा के भाई के खूब गारी देवे लोग ता की दूल्हा के खीस बरो औरी अभियो बबुवा छोड़ के भाग जास पर उनकर आपन सपना के रानी के आगा काहा कुछो लौउके | लाईकी जब सिन्दूरदान के बेरा आवेले त लाल साडी में आवेले उहा भी लईका के सावधान कईल जाला की देख बबुवा तोहरा जिनगी में खतरा के लाल रंग ओढले खतरनाक नागिन के आगमन होखेवाला बा | लाल चूड़ी, लाल टिकुली, लाल होठलाली, लाल महावर औरी लाल नोहपालिस सब खतरे के चिन्हासी रहेला बाकिर लईका ओह बेर पूरा भेडा बन गईल रहलन उनकर मालूम रहेला की आगा गाडहा खोनाइल बा औरी ओह गाडहा में बहुते कोई गिरल बा फिर भी लाइका लोग जान बुझ के गिरे के चाहे लोग |